भुवनेश्वर, (निप्र) : सोमवार को राज्य भर से लगभग 50,000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने भुवनेश्वर के लोअर पीएमजी स्वानिप्यर पर अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उनकी प्रमुख मागों में वेतन वृद्धि, पेंशन और सरकारी कर्मचारियों के रूप में मान्यता की मांग शामिल है। सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पुनरीक्षित वेतन के तत्काल कार्यान्वयन की मांग की, जिसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 18,000 रुपये और सहायिकाओं को 9,000 रुपये मासिक वेतन देने के साथ-साथ राज्य प्रशासन के नियमित कर्मचारियों के समान सेवा लाभ प्रदान करने की बात शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी भूमिका को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप औपचारिक रूप से उन्नत किया जाना चाहिए।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शिक्षकों के रूप में मान्यता की मांग कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रदर्शनकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सेवानिवृत्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए 5,000 रुपये मासिक पेंशन और सहायिकाओं के लिए 3,000 रुपये मासिक पेंशन की मांग की, जिसमें सेवानिवृत्ति शब्द का उपयोग आधिकारिक रूप से किया जाए, न कि 'डिसएंगेजमेंटÓ का। प्रदर्शन समूहों के अनुसार, लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारी जब प्रणाली से बाहर होते हैं तो राज्य अभिलेखों में प्रयुञ्चत शब्दावली के कारण उन्हें अपमान का सामना करना पड़ता है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को इसे ठीक करना चाहिए और सेवा उपरांत कल्याण सुनिश्चित करना चाहिए। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि पहले के प्रदर्शनों के दौरान सरकार द्वारा दिए गए कई आश्वासन पूरे नहीं किए गए। उनमें से एक ने दावा किया कि प्रशासन ने चुनावों के दौरान 3,000 रुपये की एकमुश्त राशि की घोषणा की थी, जबकि यह उनकी प्रारंभिक मांगों का हिस्सा नहीं था।
उन्होंने कहा, सरकार आश्वासन तो देती है लेकिन उन्हें पूरा करने में लापरवाही करती है। बार-बार वादों के बावजूद कई फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को अभी तक फील्ड कार्यों के लिए अनिवार्य मोबाइल फोन नहीं मिले हैं। हमें पति और बच्चों से फोन उधार लेने पड़ते हैं, जो लोग ऐसा नहीं कर पाते उनका वेतन काट लिया जाता है। कार्यकर्ताओं ने रणनीतिक रूप से आगामी विधानसभा सत्र से पहले यह प्रदर्शन किया है ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके। एक प्रतिभागी ने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य टकराव नहीं है, बल्कि उन न्यूनतम सुविधाओं को सुरक्षित करना है जो सरकार द्वारा सौंपे गए कर्तव्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं। उसने कहा, हम सरकार के काम में बाधा नहीं डालना चाहते, लेकिन हम चाहते हैं कि वह हमारी समस्याओं को पहचाने और जोर देकर कहा कि उनकी मांगें निजी प्रोत्साहन नहीं, बल्कि सुचारू कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक हैं। ये मांगें केवल हमें सरकार द्वारा निर्धारित कार्यों को पूरा करने में सक्षम बनाएंगी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे तब तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते।