भुवनेश्वर, (निप्र) : राज्य में धान संग्रह के दौरान अन्नदाताओं को किस प्रकार व्यवस्थागत शोषण और उससे उत्पन्न पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है, इसे लेकर विपक्षी दल के नेता नवीन पटनायक ने गहरी चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि कृषि ओडिशा की जीवनरेखा है। इसके बावजूद प्रशासनिक उदासीनता और जनता से किए गए चुनावी वादों को पूरा करने में विफलता के कारण चालू खरीफ धान संग्रह प्रक्रिया किसानों के लिए एक संघर्षपूर्ण स्थिति बन गई है। 2024 आमचुनाव के दौरान भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र के दूसरे प्वाइंट में धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि और कटनी-छंटनी पूरी तरह बंद करने का वादा किसानों से किया गया था, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि राज्य की मंडियां अब उत्पीडऩ के केंद्र बन चुकी हैं। उन्होंने निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर मुख्यमंत्री के त्वरित हस्तक्षेप की मांग की।
::कटनी-छंटनी :
अन्नदाताओं से बिना किसी परेशानी के धान खरीदने का वादा सरकार द्वारा किए जाने के बावजूद नमी और निम्न गुणवत्ता जैसे बहानों पर उनसे प्रति क्विंटल 5 से 7 किलोग्राम तक कटनी-छंटनी किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। कई जिलों में इस प्रकार का शोषण किसानों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। मिलरों और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण किसानों को उनके कठिन परिश्रम का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। क्या यह भाजपा द्वारा चुनाव के समय किए गए झूठे वादों का उदाहरण नहीं है? यह कटनी-छंटनी कब बंद होगी? आपकी सरकार चुनावी वादों को कब पूरा करेगी? चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार किसानों को न्याय कब मिलेगा? राज्य के सभी किसान भाइयों-बहनों को प्रति क्विंटल 800 रुपये इनपुट सब्सिडी देने की घोषणा भाजपा सरकार ने की थी। लेकिन हाल ही में सरकार द्वारा इस सब्सिडी के लिए प्रति किसान अधिकतम 150 क्विंटल की सीमा तय करना वादाखिलाफी का स्पष्ट उदाहरण है। यह सीमा अधिक उत्पादन करने वाले किसानों के लिए दंड स्वरूप है और भाजपा के संकल्प पत्र के विपरीत है। किसानों को उनके संपूर्ण उत्पादन पर 3100 रुपये इनपुट सब्सिडी देने की घोषणा से सरकार पीछे क्यों हट रही है? यह उल्लेखनीय है कि हाल ही में भारत सरकार ने धान के समर्थन मूल्य में 69 रुपये की वृद्धि की है। ओडिशा के किसानों को यह बढ़ी हुई 69 रुपये की राशि न देना क्या धोखा नहीं है?
:: मंडियों में अव्यवस्था :
दुख की बात यह है कि धान मंडियों में खरीद प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है। परिणामस्वरूप धान को ओस और चोरी से बचाने के लिए किसानों को रात भर जागना पड़ रहा है। मंडियों में न्यूनतम सुविधाओं का अभाव, टोकन व्यवस्था की विफलता और भुगतान में अनावश्यक देरी जैसी समस्याएं किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र के दूसरे प्वाइंट में 48 घंटे के भीतर डीबीटी के माध्यम से भुगतान का वादा किया गया था, लेकिन अधिकांश मामलों में किसानों को उनका हक पाने में एक सप्ताह से अधिक समय लग रहा है। क्या यह भाजपा द्वारा चुनावी वादों को पूरा न करने का प्रमाण नहीं है?
: कम दाम पर बिक्री :
कटनी-छटंनी, 150 क्विंटल की सीमा और धान की खरीद व भुगतान में हो रही अनावश्यक देरी ने राज्य में एक असामान्य स्थिति पैदा कर दी है। इसके चलते किसान असाधु व्यापारियों और मिलरों के शोषण का शिकार हो रहे हैं। कर्ज चुकाने की मजबूरी में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी काफी कम दाम पर धान बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है। विपक्षी दल के नेता नवीन पटनायक ने स्पष्ट किया है कि ओडिशा के किसान किसी की दया नहीं चाहते। वे केवल भाजपा द्वारा चुनाव के समय किए गए वादों के अनुसार अपना हक मांग रहे हैं। अन्नदाता सम्मान के पात्र हैं। इसी भावना के साथ किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए सरकार से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।
उन्होंने कहा है कि मंडियों में कटनी-छंटनी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए तुरंत विशेष दस्तों की तैनाती की जाए और दोषी मिल मालिकों तथा सरकारी अधिकारियों के खिलाफ उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही इनपुट सब्सिडी के लिए प्रति किसान 150 क्विंटल की सीमा को तुरंत वापस लिया जाए और पंजीकृत सभी किसानों से उनकी पूरी उपज की खरीद सुनिश्चित की जाए। पत्र में यह भी कहा गया है कि भाजपा के चुनावी वादे के अनुरूप धान की खरीद के 48 घंटे के भीतर डीबीटी के माध्यम से किसानों को उनका भुगतान किया जाए। साथ ही मंडियों में खुले में पड़े धान को 72 घंटे के भीतर शत-प्रतिशत उठाने की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को रातभर अपनी फसल की रखवाली न करनी पड़े। नवीन पटनायक ने चेतावनी दी है कि किसानों की शिकायतों के समाधान में सरकार की विफलता पूरे राज्य में किसान आंदोलन को और तेज कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार इन गंभीर समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देगी और चुनाव के दौरान किसानों से किए गए वादों को निभाएगी।