झारसुगुड़ा, (निप्र): वेदांता एल्युमीनियम ने झारसुगुड़ा स्थित अपने मेगा एल्युमीनियम प्लांट में अत्याधुनिक कूलिंग सिस्टम ‘फोर्स्ड कूलिंग नेटवर्क’ (एफसीएन) स्थापित किया है। यह इन-हाउस विकसित तकनीक एल्युमीनियम रिडक्शन सेल्स (पॉट्स) में थर्मल मैनेजमेंट को बेहतर बनाती है। इसमें एडवांस्ड कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स (सीएफडी) मॉडलिंग का उपयोग किया गया है, जिससे एयरफ्लो, प्रेशर और तापमान नियंत्रण अधिक सटीक तरीके से संभव हो पाया है। इस नई तकनीक को ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी द्वारा आयोजित नेशनल एनर्जी कंजर्वेशन अवार्ड्स 2025 में ‘सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट’ से सक्वमानित किया गया है।
कंपनी के अनुसार, इस सिस्टम के जरिए साइडवॉल ओवरहीटिंग रोकी जा रही है, थर्मल बैलेंस बेहतर हुआ है और पॉटलाइन ऑपरेशन्स अधिक स्थिर बने हैं। डिजिटल सिमुलेशन के जरिए पॉट स्ट्रञ्चचर, कूलिंग डक्ट्स और एयरफ्लो पाथवे का पहले से विश्लेषण कर हीट डिसिपेशन को ऑप्टिमाइज किया गया। यह सिस्टम फिलहाल पॉटलाइन के एक हिस्से में लागू किया गया है और जल्द ही पूरे पॉटलाइन में विस्तार की योजना है।
कंपनी का दावा है कि इससे प्रति टन एल्युमीनियम उत्पादन पर लगभग 15.3 प्रतिशत ऊर्जा की बचत हो रही है। इस अवसर पर वेदांता एल्युमीनियम, झारसुगुड़ा के सीईओ सी. चंद्रू ने कहा कि कंपनी में इनोवेशन को प्राथमिकता दी जाती है। डिजिटल तकनीक और इंजीनियरिंग के बेहतर समन्वय से न केवल पॉटलाइन की स्थिरता बढ़ी है, बल्कि ऊर्जा दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कंपनी ने बताया कि वह इंडस्ट्री 4.0 के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर औद्योगिक सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता और सस्टेनेबल ग्रोथ को बढ़ावा दे रही है।
उल्लेखनीय है कि वेदांता लिमिटेड का व्यवसायिक अंग वेदांता एल्युमीनियम देश का सबसे बड़ा एल्युमीनियम उत्पादक है। कंपनी भारत मेंएल्युमीनियम स्मेल्टर्स, एल्युमिना रिफाइनरी और पावर प्लांट्स का संचालन करती है तथा वैल्यू-एडेड एल्युमीनियम उत्पादों के क्षेत्र में अग्रणी मानी जाती है।