भुवनेश्वर, (निप्र) : मारवाड़ी समाज की महिलाओं का प्रमुख गणगौर उत्सव धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। राज्य भर में होली के दूसरे दिन से शुरू हुआ यह उत्सव छोटी और बड़ी गणगौर के विसर्जन के साथ संपन्न हो गया। उल्लेखनीय है कि महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए और युवतियां अच्छा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं। राजधानी भुवनेश्वर के साथ ही कटक, जटनी व अन्य जगहों पर गणगौर मेले का आयोजन किया गया और विभिन्न प्रतियोगिताओं साथ उत्सव का समापन हुआ।
भुवनेश्वर में ब्लाइंड एसोसिएशन के सम्मेलन कक्ष में मारवाड़ी समाज की महिलाओं की ओर से गणगौर मेले का आयोजन किया गया। इसी प्रकार जटनी में गोपीनाथ जी मंदिर में मेले का आयोजन किया गया। कटक तथा बामड़ा, बालेश्वर व अन्य स्थानों पर गणगौर मेले का समापन हुआ। विभिन्न स्थानों पर मेले में लाई गई गणगौर को पुरस्कृत किया गया। इन दिनों में विवाहित महिलाएं इस्सरजी (शिवजी के रूप में बनाई गई मूर्ति रूपी पिंडी) और गणगौर (पार्वतीजी) की पूजा करती हैं। सुहागिन महिलाएं अंतिम दिन विधि विधान से पूजन कर अपनी-अपनी गणगौर को सखी सहेलियों के साथ शोभायात्रा में परंपरागत मारवाड़ी गीत गाते हुए गणगौर विसर्जन के लिए निकलती हैं।
इस वर्ष शनिवार को अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन, जटनी शाखा द्वारा आयोजित गणगौर मेले में विवाहित युवतियां अपने परिवार की महिलाओं और सखी सहेलियों के साथ सुसज्जित गणगौरों को लेकर, परंपरागत गीत गाते हुए मेले में पहुंचीं। इस वर्ष ग्यारह से ज्यादा जोड़ी छोटी एवं एक जोड़ी बड़ी गणगौर को सुंदर सुसज्जित वस्त्रों एवं फूलों से सजाकर नवविवाहित युवतियां अपनी सहेलियों के साथ मेले में पहुंची थी। इनमें से श्रेष्ठ और कलात्मक ढंग से सजाकर लाई गई छोटी एवं बड़ी गणगौर को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
इस वर्ष कुल 5 गणगौर मेले में आई थीं। प्रथम पुरस्कार निशिका संतुका की टीम को, द्वितीय पुरस्कार प्रिया सोंथालिया की टीम को, तृतीय पुरस्कार आलिसा सोनी की टीम को दिया गया। इस अवसर पर वयस्क तथा युवा महिलाओं द्वारा आकर्षक राजस्थानी नृत्य, म्यूजिक चेयर प्रतियोगिता, गणगौर पूजा करनेवाली युवतियों के बीच श्रृंगार प्रतियोगिता, क्विज प्रतियोगिता, अंताक्षरी प्रतियोगिता की गई थी और श्रेष्ठ विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।