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Sunday, Apr 5, 2026
Published on: Saturday, April 04, 2026
व्यापार

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से बीकानेर का नमकीन निर्यात प्रभावित


 
खाड़ी व यूरोप के देशों में बड़ी मात्रा में नमकीन, मसाले होते हैं निर्यात
जयपुर, (एजेंसी) : पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब बीकानेर इलाके के निर्यातकों पर भी पडऩे लगा है। व्यापारियों को इस संघर्ष के कारण खाड़ी और यूरोपीय देशों में भुजिया, पापड़ और मसालों जैसा सामान भेजने में भारी रुकावट आ रही है। बीकानेर अपने नमकीन उत्पादों के लिए विख्यात है और यहां से खाड़ी व यूरोप के देशों में बड़ी मात्रा में नमकीन, मसाले और दूसरे सामान निर्यात होते हैं। हालांकि निर्यातकों ने बताया कि युद्ध की वजह से सामान भेजने में देरी हो रही है। साथ ही माल ढुलाई की लागत बढ़ी है तो कंटेनरों की कमी है। इसका असर निर्यात व आयात दोनों पर दिखने लगा है।
भीखाराम ग्रुप से जुड़े नमकीन कारोबारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि कच्चे माल और ढुलाई आदि की बढ़ती लागत से उद्योग को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा, ैयुद्ध की वजह से माल भाड़े में भारी बढ़ोतरी हुई है और कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में खाद्य तेल की कीमत में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है। निर्यातकों के अनुसार कंटेनरों का आवागम काफी धीमा हुआ है। जो खेप पहले लगभग 30 दिन में पहुंच जाती थी उसमें अब 60 दिन तक का समय लग रहा है क्योंकि युद्ध के चलते उसे लंबे और सुरक्षित रास्तों से भेजा जा रहा है। एक निर्यातक राजेश जिंदल ने कहा कि आने वाले और जाने वाले दोनों तरह के माल की खेप में देरी हो रही है। इससे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, आने वाला और जाने वाला, दोनों तरह का माल देर से पहुंच रहा है और लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। अरब देशों में बीकानेरी नमकीन (स्नैक्स) और मसालों की मांग अब भी काफी ज़्यादा है, लेकिन आपूर्ति ढांचे में आई रुकावटों की वजह से नुकसान हो रहा है। उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार बीकानेर से हर महीने भुजिया, पापड़ और नमकीन के 15 से 20 कंटेनर निर्यात किए जाते हैं। दूसरे सामान के लगभग 60 कंटेनर भी बाहर भेजे जाते हैं। फिलहाल इस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा रुक गया है। बताया जा रहा है कि करोड़ों रुपए की खेप बंदरगाहों पर या रास्ते में अटकी हुई हैं।

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