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Wednesday, Apr 15, 2026
Published on: Tuesday, April 14, 2026
व्यापार

ईंधन, उर्वरक की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं : आईएमएफ, विश्व बैंक, आईईए


 वॉशिंगटन : अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) का कहना है कि पश्चिम एशिया में युद्ध से स्थिति अनिश्चित बनी रहने के मद्देनजर ईंधन और उर्वरक की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक समूह के प्रमुखों ने पश्चिम एशिया में युद्ध के ऊर्जा एवं आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए इस महीने की शुरुआत में गठित समन्वय समूह के हिस्से के रूप में यहां मुलाकात की। संयुक्त बयान में तीनों संस्थानों ने कहा कि युद्ध के कारण लोगों का जबरन विस्थापन हुआ है, रोजगार प्रभावित हुए हैं और यात्रा व पर्यटन में गिरावट आई है जिसे सामान्य होने में समय लग सकता है। बयान में कहा गया, जैसा कि हमने इस महीने की शुरुआत में उल्लेख किया था कि युद्ध का प्रभाव व्यापक, वैश्विक और अत्यधिक असमान है। इसका असर खास तौर पर ऊर्जा आयात करने वाले देशों और निम्न-आय वाले देशों पर अधिक पड़ा है। इसमें कहा गया कि इस झटके के कारण तेल, गैस एवं उर्वरकों की कीमतें बढ़ी हैं जिससे खाद्य सुरक्षा तथा रोजगार को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं। बयान के अनुसार, पश्चिम एशिया के कुछ तेल एवं गैस उत्पादक देशों को निर्यात राजस्व में भी भारी नुकसान हुआ है।  इसमें कहा गया कि पश्चिम एशिया की स्थिति अब भी बेहद अनिश्चित है और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का आवागमन अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। समन्वय समूहों ने कहा, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य से सामान्य आवाजाही बहाल हो जाए, फिर भी प्रमुख वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति को युद्ध के पूर्व स्तर पर लौटने में समय लगेगा और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण ईंधन एवं उर्वरक की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।  इसमें कहा गया कि आपूर्ति में बाधाओं के कारण आवश्यक कच्चे माल की कमी से ऊर्जा, खाद्य एवं अन्य उद्योगों पर असर पड़ सकता है। युद्ध के कारण लोगों का विस्थापन, रोजगार पर असर और यात्रा व पर्यटन में कमी आई है जिसे सामान्य होने में समय लगेगा। इन तीनों संस्थानों के प्रमुखों ने ऊर्जा बाजार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और विभिन्न देशों पर युद्ध के प्रभाव के अपने ताजा आकलन साझा किए। यह बैठक आईईए की मासिक ऑयल मार्केट रिपोर्ट और आईएमएफ के वल्र्ड इकोनॉमिक आउटलुक जारी होने से पहले हुई।
 

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