खरीफ सीजन से पहले सप्लाई और वितरण की हुई समीक्षा
भुवनेश्वर, (निप्र) : मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को लोकसेवा भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में खरीफ ऋतु के लिए उर्वरकों की उपलब्धता एवं संतुलित वितरण की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ पर विशेष जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के प्रत्येक किसान, चाहे वह छोटा हो या सीमांत, उसे उसकी आवश्यकता के अनुसार समय पर खाद उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों के साथ वर्चुअल के माध्यम से चर्चा करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण उर्वरक उत्पादन प्रभावित हुआ है, ऐसे में राज्य में आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल आंकड़ों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर वितरण सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में कृषि विभाग के आयुक्त-सह-सचिव सचिन रामचंद्र यादव ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार द्वारा चालू वर्ष में राज्य को 11,42,950 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। अप्रैल माह के लिए 79,630 मीट्रिक टन की आवश्यकता है, जबकि 15 अप्रैल तक 3,61,490 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। राज्य में वर्तमान में 1.77 लाख मीट्रिक टन यूरिया एवं 60 हजार मीट्रिक टन से अधिक डीएपी का भंडार मौजूद है।
उन्होंने बताया कि राज्य में 1,029 थोक विक्रता एवं 12,093 खुदरा विक्रेता सक्रिय हैं और विभिन्न उर्वरक कंपनियों द्वारा आपूर्ति भी सामान्य रूप से जारी है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा विभिन्न डीलर प्वाइंट्स की जांच कर 6 लाइसेंस रद्द किए गए हैं। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि केंद्र सरकार के उर्वरक विभाग द्वारा एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) लागू की गई है, जिसके माध्यम से प्रत्येक जिले में उर्वरक की दैनिक उपलब्धता और वितरण की निगरानी की जा रही है।
कालाबाजारी व तस्करी पर सख्ती के आदेश
मुख्यमंत्री माझी ने जिलाधिकारियों को छह महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि कालाबाजारी एवं अवैध भंडारण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, गोदामों की नियमित जांच हो और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लाइसेंस रद्द किए जाएं। सीमावर्ती क्षेत्रों में उर्वरक की तस्करी रोकने के लिए पुलिस एवं कृषि विभाग संयुक्त रूप से निगरानी बढ़ाएं और संदिग्ध वाहनों की जांच अनिवार्य रूप से की जाए। सब्सिडी युक्त यूरिया का औद्योगिक उपयोग (रेजिन, प्लाईवुड, पशुखाद्य आदि) में दुरुपयोग रोकने के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स सक्रिय रहे।
पंचायत स्तर पर उर्वरक उपलब्धता एवं वितरण की निगरानी के लिए निगरानी समितियों का गठन किया जाए। राज्य की 6,794 ग्राम पंचायतों में से 6,229 में समितियां गठित हो चुकी हैं, शेष को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। किसानों का डिजिटल पंजीकरण मिशन मोड में पूरा किया जाए। अब तक 44 लाख किसानों में से 15 लाख का डिजिटल फार्मर आईडी बनाया जा चुका है। किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचते हुए संतुलित उर्वरक, जैविक खाद और नैनो यूरिया के उपयोग के लिए जागरूक किया जाए।
बैठक में उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने कहा कि केंद्र सरकार समय-समय पर उर्वरक संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर रही है, जिनका पालन सुनिश्चित किया जाए। वहीं सहकारिता मंत्री प्रदीप बल सामंत ने उर्वरक वितरण व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर मुख्य सचिव अनु गर्ग, सहकारिता विभाग के आयुक्त-सह-सचिव राजेश प्रभाकर पाटिल तथा कृषि एवं सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।