संसद के विशेष सत्र में विधेयक को मंजूरी की उम्मीद
भुवनेश्वर, (निप्र) : राज्य की उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा ने रविवार को महिला आरक्षण विधेयक को लेकर महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था न केवल महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि शासन-प्रशासन में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करेगी।
परिडा ने कहा कि आज देश की महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर बन रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त होकर कई महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में उभर रही हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल के चुनावों में महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही है, जो समाज में महिलाओं की बढ़ती जागरुकता और राजनीतिक रुचि को दर्शाता है। उपमुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने महिलाओं के उत्थान के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष तीन दिवसीय सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें महिला आरक्षण विधेयक को पारित किए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा, 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा और उन्हें केवल योजनाओं के लाभार्थी के बजाय नीति निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाएगा। यह कदम विकसित भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। ओडिशा की महिलाओं से इन ऐतिहासिक दिनों को एक उत्सव के रूप में मनाने का आह्वान करते हुए, उपमुख्यमंत्री ने व्यापक जनभागीदारी की अपील की।
उन्होंने लोगों से 9667173333 पर मिस्ड कॉल देकर इस अभियान का समर्थन करने तथा इस अवसर को यादगार बनाने के लिए रैलियां, जुलूस और बैठकों के आयोजन का आग्रह किया। उन्होंने महिलाओं से सोशल मीडिया पर भी अपना गर्व और समर्थन व्यक्त करने की अपील की। इस अवसर पर भाजपा की वरिष्ठ नेता एवं सांसद अनीता शुभदर्शिनी, राज्य महिला मोर्चा की अध्यक्ष ऐश्वर्या बिस्वाल और कस्तूरी मिश्र सहित अन्य नेता उपस्थित थीं।
बीजद ने बीजू पटनाय को दिया श्रेय
इस बीच, इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। बीजू जनता दल (बीजद) ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए इस पहल के श्रेय को लेकर सवाल उठाया है। बीजद नेता टुकुनी साहू ने कहा कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक ने अपने कार्यकाल के दौरान ही महिलाओं के आरक्षण की जोरदार वकालत की थी और उनके सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए थे।
साहू कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बीजू पटनायक की दूरदर्शिता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इस पहल का वास्तविक श्रेय उन्हें ही मिलना चाहिए। कुल मिलाकर, महिला आरक्षण विधेयक को लेकर जहां एक ओर इसे ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच इसके श्रेय को लेकर बहस भी तेज होती जा रही है।