कहा-त्याग और समर्पण से खड़ा हुआ संघ का विशाल वटवृक्ष
कटक, (निप्र) : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शताब्दी यात्रा को कठोर साधना बताते हुए संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी ने कहा कि हजारों स्वयंसेवकों के त्याग, समर्पण और नि:स्वार्थ सेवा के बल पर संगठन आज इस मुकाम तक पहुंचा है। शनिवार शाम सारला भवन में आयोजित प्रमुख नागरिक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1925 में स्थापित संघ आज एक विशाल वटवृक्ष के रूप में विकसित हो चुका है।
उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान संघ के संस्थापक सहित हजारों स्वयंसेवकों ने जेल यातनाएं सही, जबकि अंग्रेज सरकार ने कई स्वयंसेवकों को फांसी तक दी। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने संघ पर तीन बार प्रतिबंध लगाया और हजारों स्वयंसेवकों को जेल में यातनाएं झेलनी पड़ीं। इसके बावजूद संगठन ने अपने कार्य को निरंतर आगे बढ़ाया और आज देशभर में लाखों शाखाओं तथा डेढ़ लाख से अधिक सेवा कार्यों के माध्यम से समाजसेवा कर रहा है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उड़ीसा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति विमल प्रसाद दास उपस्थित रहे। उन्होंने संघ के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि देश की सेवा और संस्कार निर्माण के क्षेत्र में संघ का योगदान अतुलनीय है। संगोष्ठी की अध्यक्षता जिला संघचालक बिपिन बिहारी राउत ने की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में किशोर मोहंती, शरत सेन, दुर्गाचरण बेहरा, बिघेश्वर स्वाईं, डॉ नारायण मोहंती, कुलमणि प्रधान, लक्ष्मीधर परिडा, नारायण षड़ंगी सहित कई लोगों का सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में विश्व रंजन स्वाईं ने धन्यवाद ज्ञापन किया।