न्यायमूर्ति ने बैंक के आदेश को किया खारिज
कटक, (निप्र) : उड़ीसा उच्च न्यायालय ने कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति के बाद किसी कर्मचारी की पदोन्नति को वापस नहीं लिया जा सकता। अदालत ने कहा कि सेवा निवृत्ति के बाद प्रशासनिक निर्णयों के जरिए कर्मचारी की स्थिति में बदलाव नहीं किया जा सकता। यह फैसला न्यायमूर्ति बिरजा प्रसन्न शत्पथी ने कटक अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के पूर्व कर्मचारी सागर केशरी नायक की याचिका पर सुनाया।
नायक ने आरोप लगाया था कि सेवानिवृत्ति के बाद बैंक ने उनकी पदोन्नति रद्द कर दी और अतिरिक्त वेतन की वसूली का आदेश जारी किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नायक वर्ष 1990 में जूनियर असिस्टेंट के रूप में बैंक में नियुक्त हुए थे। जून 2022 में विभागीय पदोन्नति समिति ने उन्हें सीनियर असिस्टेंट से असिस्टेंट मैनेजर (ग्रेड-4) पद पर पदोन्नत करने की सिफारिश की थी।
बैंक ने 23 जून को इस पदोन्नति को मंजूरी देते हुए इसे 1 जून से प्रभावी किया। नायक ने 29 जून को नए पद का कार्यभार संभाला और 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए। लेकिन सेवानिवृत्ति के लगभग दो महीने बाद, 26 अगस्त 2022 को बैंक ने पदोन्नति रद्द करते हुए अतिरिक्त वेतन की वसूली का आदेश जारी कर दिया। बैंक ने अपने फैसले को सेवा नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक कारणों से उचित ठहराने की कोशिश की।
अदालत ने बैंक के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि जब पदोन्नति वापस ली गई, उस समय नायक सेवा में नहीं थे। ऐसे में उनके खिलाफ किसी प्रकार की वसूली या पद स्थिति में बदलाव करना कानूनी रूप से गलत है। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बाद दी गई सुविधाओं की वसूली नहीं की जा सकती।
कर्मचारी को पदोन्नति से जुड़े सभी वित्तीय लाभ मिलेंगे। सेवानिवृत्ति के समय जो पद स्थिति होती है, उसे बाद में बदला नहीं जा सकता। अदालत ने बैंक के आदेश को रद्द करते हुए यह महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित किया कि सेवानिवृत्ति के साथ ही कर्मचारी और नियोक्ता के बीच संबंध समाप्त हो जाता है और उसके बाद कर्मचारी के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।