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  • भारत व नॉर्वे के संयुक्त सहयोग से राज्य में लागू होगा एमएसपी, राज्य और केंद्र के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर
Thursday, Apr 16, 2026
Published on: Thursday, April 16, 2026
राज्य

भारत व नॉर्वे के संयुक्त सहयोग से राज्य में लागू होगा एमएसपी, राज्य और केंद्र के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर


‘विकसित ओडिशा 2036’ व ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य को मिलेगा समर्थन
 
भुवनेश्वर, (निप्र) : राज्य में तटीय अर्थव्यवस्था और समुद्री पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से मरीन स्पेशल प्लान (एमएसपी) लागू किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और केंद्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के बीच गुरुवार को लोकसभा भवन में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी उपस्थित थे।
 
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अतिरिक्त सचिव पूजा मिश्र तथा नेशनल सेंटर फॉर कोस्टल रिसर्च (एनसीसीआर) के निदेशक डॉ आरएस कन्करा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि एमएसपी लागू होने से राज्य की ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इससे स्थानीय तटीय अर्थव्यवस्था के विकास के साथ समुद्री जैव विविधता का संरक्षण भी संभव होगा।
 
उन्होंने कहा कि समन्वित तटीय और समुद्री योजना के कार्यान्वयन में एमएसपी एक नया मानक स्थापित करेगा। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार और नॉर्वे सरकार के संयुक्त सहयोग से वर्ष 2019 से देश में ‘सस्टेनेबल ओशन प्लानिंग’ की शुरुआत की गई है। पहले चरण में इसे पुडुचेरी और लक्षद्वीप में लागू किया गया था, जबकि दूसरे चरण में ओडिशा इस योजना को लागू करने वाला पहला राज्य बना है।
 
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ओडिशा का तटीय और समुद्री क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है और यह क्षेत्र स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा आजीविका के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन प्रदान करता है। विकास कार्यों, पर्यावरण पर उनके प्रभाव तथा विभिन्न क्षेत्रों की बढ़ती मांग को देखते हुए समुद्री क्षेत्रों का वैज्ञानिक प्रबंधन आवश्यक हो गया है। एमएसपी इस दिशा में एक समयोचित कदम है, जो मत्स्य पालन, पर्यटन, बंदरगाह और समुद्री ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के साथ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में सहायक होगा।
 
उन्होंने आगे बताया कि पिछले वर्ष अगस्त में समुद्री पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विकास के लिए ओडिशा मरीन बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन कॉरिडोर (ओएमबीआरआईसी) की शुरुआत की गई थी, जो एमएसपी कार्यक्रम को और मजबूत करेगा। विकसित ओडिशा 2036 और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए तटीय अर्थव्यवस्था और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है।
 
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके समर्थन के कारण ही ओडिशा को इस योजना के दूसरे चरण में शामिल होने का अवसर मिला है। कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कृष्णचंद्र पात्र ने कहा कि एनसीसीआर समुद्री अनुसंधान का एक अग्रणी संस्थान है, जो समुद्री जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और समुद्री संसाधनों के उपयोग के लिए महत्वपूर्ण मॉडल विकसित कर चुका है।
 
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने कहा कि एमएसपी वर्ष 2036 और 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिसमें मत्स्य, पर्यटन और समुद्री संसाधनों के अधिकतम उपयोग के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया जाएगा। केंद्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ एम रविचंद्रन ने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन 2047 को साकार करने के लिए आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान भी जरूरी है और एमएसपी इसमें सहायक सिद्ध होगा।
 
रॉयल नॉर्वेजियन एम्बेसी के डिप्टी एम्बेसडर अर्विन गाडगिल ने कहा कि ओडिशा का समृद्ध समुद्री इतिहास और लंबा तट क्षेत्र इसे इस पहल के लिए उपयुक्त बनाता है, और नॉर्वे सरकार इस दिशा में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव चित्र अरुमुगम ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर विकास आयुक्त, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, केंद्र और राज्य सरकार के उच्च अधिकारी तथा नॉर्वे सरकार के प्रतिनिधि उपस्थित थे। 

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