कड़ी सुरक्षा में आभूषणों का सत्यापन जारी, 3डी मैपिंग और वीडियोग्राफी से हो रहा दस्तावेजीकरण
पुरी, (निप्र) : श्री जगन्नाथ मंदिर के भीतरी रत्न भंडार (इनर रत्न भंडार) में रखे बहुमूल्य आभूषणों की गणना और सत्यापन प्रक्रिया गुरुवार से फिर शुरू हो गई है, जो 18 अप्रैल तक जारी रहेगी। इस दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक प्रोटोकॉल को देखते हुए श्रद्धालुओं को भितर काठ (गर्भगृह के अंदर) से दर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही है और उन्हें बाहरी बैरिकेड से ही भगवान के दर्शन करने होंगे।
पहले दिन की गणना में 20 से अधिक आभूषणों का सत्यापन किया गया था और अब प्रक्रिया उसी बिंदु से आगे बढ़ाई जा रही है। पूरी प्रक्रिया कड़ी निगरानी और निर्धारित नियमों के तहत संचालित की जा रही है, जिससे किसी भी प्रकार की चूक या गड़बड़ी की संभावना न रहे। रत्न भंडार को प्रतिदिन सुबह की नीतियों के बाद खोला जा रहा है। चाबी जिला कोषागार से मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में लाई जाती है और आधिकारिक निगरानी में कक्ष को खोलने के बाद ही गणना कार्य शुरू होता है।
इस पूरी प्रक्रिया की देखरेख रत्न भंडार निरीक्षण समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति बिश्वनाथ रथ के नेतृत्व में की जा रही है। केवल अधिकृत सदस्यों को ही अंदर प्रवेश की अनुमति दी गई है। गणना के दौरान भंडार नायक, भंडार मेकाप, तड़ाउ करण और देउला करण जैसे पारंपरिक पदाधिकारियों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रह रहे हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस बार आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है, जिसमें आभूषणों की 3डी मैपिंग, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी शामिल है।
आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, भीतरी रत्न भंडार में 367 प्रकार के स्वर्ण आभूषण और 231 प्रकार के रजत आभूषण सुरक्षित रखे गए हैं। इससे पहले 25 मार्च को बाहरी रत्न भंडार की गणना पूरी की जा चुकी है, जबकि भीतरी भंडार की प्रक्रिया 13 अप्रैल से शुरू होकर 18 अप्रैल तक पूर्ण होने की संभावना है।
प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया मंदिर की संपत्ति के सटीक दस्तावेजीकरण और सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं, श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की गई है ताकि यह संवेदनशील कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके।