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Thursday, Apr 16, 2026
Published on: Thursday, April 16, 2026
राज्य

संविधान संशोधन पर नवीन पटनायक की चेतावनी, बोले- ओडिशा के हितों पर पड़ सकता है असर


नवीन पटनायक ने सांसदों को लिखा पत्र 
 
भुवनेश्वर, (निप्र) : नेता प्रतिपक्ष और बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने ओडिशा के सभी सांसदों को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि प्रस्तावित 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक राज्य के राजनीतिक और आर्थिक हितों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। अपने पत्र में पटनायक ने कहा कि वे महिला सशक्तिकरण और आरक्षण के प्रबल समर्थक हैं, लेकिन महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने का वर्तमान प्रस्ताव अपने घोषित उद्देश्य से परे कई चिंताएं पैदा करता है।
 
पटनायक ने आगाह किया कि परिसीमन की प्रक्रिया से लोकसभा में ओडिशा का प्रतिनिधित्व घट सकता है। पत्र के अनुसार, राज्य की हिस्सेदारी 3.9 प्रतिशत से घटकर 3.4 प्रतिशत हो सकती है, जिससे यह प्रतिनिधित्व खोने वाले शीर्ष राज्यों में शामिल हो जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह की कमी से राष्ट्रीय स्तर पर निर्णय-निर्माण में ओडिशा की आवाज कमजोर होगी और आपदा प्रबंधन, आदिवासी कल्याण तथा क्षेत्रीय विकास जैसे राज्य-विशेष मुद्दों को आगे बढ़ाने की उसकी क्षमता प्रभावित होगी।
 
उन्होंने इसे केवल राजनीति नहीं, बल्कि संघीय ढांचे को सुरक्षित रखने का विषय बताया। बीजेडी प्रमुख ने प्रतिनिधित्व में कमी के भावनात्मक और सांस्कृतिक प्रभावों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संसद में मौजूदगी केवल संख्या का मामला नहीं है, बल्कि यह पहचान, गौरव और इस बात से जुड़ी है कि ओडिशा का इतिहास, भाषा और आकांक्षाएं राष्ट्रीय स्तर पर सुनी जाएं।
 
उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य की आवाज को कमजोर करने वाला कोई भी कदम लोगों में हाशिये पर डाले जाने की भावना पैदा कर सकता है। पटनायक ने यह भी चिंता जताई कि महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोडऩे से अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को लाभ मिल सकता है, जिससे केंद्रीय संसाधनों के बंटवारे में असंतुलन पैदा हो सकता है। उनका कहना है कि इससे ओडिशा के वित्तीय हस्तांतरण, बुनियादी ढांचा निवेश और विकास प्राथमिकताओं में हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। 
 
पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद ओडिशा को अक्सर उनके शब्दों में भेदभावपूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ा है, जिसमें विशेष राज्य का दर्जा न दिया जाना भी शामिल है। सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील करते हुए पटनायक ने संशोधन के व्यापक प्रभावों पर गंभीरता से विचार करने को कहा।
 
उन्होंने सुझाव दिया कि आवश्यक होने पर महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से अलग किया जाना चाहिए। उन्होंने सांसदों से संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह इस मुद्दे को उठाने का आग्रह किया, ताकि ओडिशा के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि यदि राज्य की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया, तो बीजू जनता दल इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने के लिए तैयार है।
 

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