अहमदाबाद: शिवम दुबे के शानदार खेल को देखकर उनकी जितनी चर्चा होनी चाहिए थी उतनी नहीं होती लेकिन यह भारतीय ऑलराउंडर खामोश योद्धा की तरह मौजूदा टी20 विश्व कप में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए एक प्रमुख पावर-हिटर के रूप में अपनी साख बना रहा है। नामीबिया और पाकिस्तान के खिलाफ मुश्किल पिचों पर छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पारियां खेलने के बाद दुबे ने बुधवार को नीदरलैंड के खिलाफ बीच के ओवरों में भारतीय पारी को जरूरी गति प्रदान की। दुबे ने शुरू में परिस्थितियों को परखा और अपनी पहली 11 गेंद पर छह रन बनाने के बाद तेजी दिखाई। उन्होंने 31 गेंद पर 66 रन बनाकर भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी इस पारी में छह छक्के शामिल हैं। अपने दूसरे टी20 विश्व कप में खेल रहे दुबे स्पिनरों के खिलाफ अपनी सटीक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे, लेकिन अब उन्होंने तेज गेंदबाजों के खिलाफ भी खुद को उतना ही प्रभावी साबित कर दिया है।
\तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनके बेहतर प्रदर्शन का नमूना नीदरलैंड के खिलाफ देखने को मिला, जब उन्होंने लोगन वैन बीन की गेंदों की गति में होने वाले बदलावों को अच्छी तरह से समझा और उन्हें तीन छक्के जड़े। शॉर्ट बॉल के खिलाफ दुबे के खेल में कुछ सुधार आया है और इसका श्रेय वह आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) में शामिल होने के बाद की गई कड़ी मेहनत को देते हैं। उनका दृढ़ विश्वास ऐसा है कि कुछ डॉट गेंदों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि वे जानते हैं कि बड़े शॉट आखिरकार लगेंगे ही। दुबे ने मैच के बाद कहा, टी20 में जब आप डॉट बॉल खेलते हैं, तो आप पर दबाव आता है। लेकिन एक खिलाड़ी के रूप में, एक बल्लेबाज के रूप में मैं जानता हूं कि अगर मैं 10 गेंदों में दो रन बनाने के बावजूद अगर मैं अगली पांच गेंद में से दो गेंद पर छक्का लगा देता हूं तो हिसाब बराबर हो जाएगा। उन्होंने कहा, यह बात हमेशा मेरे दिमाग में रहती है। यह जरूर है कि विकेट गिरने पर साझेदारी निभाना महत्वपूर्ण होता है इसलिए अगर दो-चार गेंद खाली भी चली जाती हैं तो बहुत फर्क नहीं पड़ता क्योंकि बाद में उसका हिसाब बराबर हो जाता है। दुबे ने अपनी सफलता का श्रेय दबाव वाली परिस्थितियों में खेलने के अधिक मौके मिलने को भी दिया।