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Friday, Feb 13, 2026
Published on: Thursday, February 12, 2026
राज्य

रत्न भंडार की गुम चाबियों का मामला : रिपोर्ट विधानसभा में पेश करने का निर्देश


कटक, (निप्र) : ओडिशा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की गुम चाबियों पर जांच रिपोर्ट आगामी विधानसभा सत्र में पेश की जाए। सुनवाई के दौरान महाधिवञ्चता ने अदालत को बताया कि रत्न भंडार के भीतरी कक्ष की गुम या खोई चाबियों की जांच रिपोर्ट पहले कैबिनेट के समक्ष रखी जाएगी और उसके बाद विधानसभा में सचेत निर्णय के लिए प्रस्तुत की जाएगी। इससे पहले ओडिशा सरकार ने चाबियों के गायब होने की जांच के लिए न्यायमूर्ति रघुबीर दास आयोग का गठन किया था।
 
आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। अदालत को बताया गया कि यह रिपोर्ट 2024 विधानसभा चुनाव के बाद गठित कैबिनेट के समक्ष रखी जानी थी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि विधानसभा में रिपोर्ट पेश करने की वैधानिक प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने सरकार को यह भी निर्देश दिया कि तीन माह के भीतर भगवान श्री जगन्नाथ के आभूषणों और कीमती वस्तुओं की नई सूची का मिलान 1978 में तैयार की गई आधार सूची से पूरा किया जाए। अदालत ने कहा कि 1978 की सूची संदर्भ दस्तावेज के रूप में काम करेगी, जिससे यह सत्यापित किया जा सके कि पहले दर्ज सभी आभूषण और बहुमूल्य वस्तुएं वर्तमान भंडार से मेल खाती हैं या नहीं।
 
अदालत ने यह भी नोट किया कि रत्न भंडार की मरम्मत और संरक्षण का कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा पहले ही पूरा किया जा चुका है। मरम्मत के दौरान आभूषणों और कीमती वस्तुओं को अस्थायी मजबूत कक्षों में स्थानांतरित किया गया था और बाद में नवगठित सूचीकरण समिति की निगरानी में उन्हें उनके मूल स्थान पर रखा गया। अगस्त 2025 में श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के पुनर्गठन के बाद रत्न भंडार उप-समिति का गठन किया गया। इस समिति ने मंदिर अधिकारियों, पुरी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से परामर्श कर सूचीकरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का मसौदा तैयार किया। इस मसौदा एसओपी को उच्च स्तरीय समिति और गजपति महाराज से मंजूरी मिल चुकी है और यह फिलहाल राज्य सरकार के विचाराधीन है। मंदिर की संपत्तियों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा सकती, इस पर जोर देते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया और तीन माह बाद मामले की समीक्षा के लिए सूचीबद्ध किया।

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