भुवनेश्वर, (निप्र) : ओडिशा ने तीसरे ओडिशा नवीकरणीय ऊर्जा निवेशक सम्मेलन 2026 के सफल आयोजन के साथ पूर्वी भारत में स्वच्छ ऊर्जा निवेश के अग्रणी केंद्र के रूप में अपनी मजबूत स्थिति स्थापित की है। इस सम्मेलन में लगभग 6.8 गीगावॉट नवीकरणीय और भंडारण क्षमता के लिए 67,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव जुटाए गए। ऊर्जा विभाग, ओडिशा सरकार द्वारा ग्रिडको लिमिटेड के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में नीति निर्माता, निवेशक, डेवलपर्स, वित्तीय संस्थान, प्रौद्योगिकी प्रदाता और उद्योग जगत के नेता शामिल हुए। इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (आईफोरेस्ट) ज्ञान भागीदार रहा।
सम्मेलन का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने किया। उन्होंने राज्य का पहला पवन संसाधन आकलन और ओडिशा के छह शहरों के लिए सिटी एक्सेलेरेटर कार्यक्रम भी लॉन्च किया। उद्ïघाटन सत्र को संबोधित करते हुए सिंहदेव ने कहा कि ओडिशा भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में अग्रणी बनने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है और ओडिशा इसमें सार्थक योगदान दे रहा है। हमारी तटरेखा पवन ऊर्जा में हमें विशिष्ट बढ़त देती है, साथ ही सौर और लघु जलविद्युत की भी अपार संभावनाएं हैं। मजबूत नीतियों और अनुकूल स्वीकृति प्रक्रिया के साथ ओडिशा नवीकरणीय विकास के लिए सशञ्चत पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करता है। ऊर्जा विभाग के अतिरिञ्चत मुख्य सचिव विशाल कुमार देव ने कहा कि ओडिशा की रणनीति केवल क्षमता वृद्धि तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य प्रणाली एकीकरण है। नवीकरणीय ऊर्जा के साथ पंप्ड स्टोरेज और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को आगे बढ़ाकर हम ग्रिड स्थिरता और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। इस वर्ष के सम्मेलन में निवेशकों की प्रतिबद्धताओं और एमओयू के जरिए 6.8 गीगावॉट के लिए 67,000 करोड़ रुपये जुटाए गए। सेकी के प्रबंध निदेशक आकाश त्रिपाठी ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाना जलवायु और आर्थिक-दोनों दृष्टि से अनिवार्य है। उन्होंने कहा, ओडिशा में फ्लोटिंग सोलर और पवन ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं और यह पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के जरिए एक प्रमुख भंडारण केंद्र बन सकता है।
आईफोरेस्ट के सीईओ और अध्यक्ष डॉ चंद्र भूषण ने कहा कि फ्लोटिंग सोलर, पंप्ड स्टोरेज और बैटरी स्टोरेज को लेकर ओडिशा की सक्रिय पहल भारत में, खासकर पूर्वी भारत में, नवीकरणीय विस्तार के अगले चरण के लिए निर्णायक साबित होगी। सम्मेलन के दौरान ओडिशा ने विविध स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिनमें 5,000 मेगावॉट से अधिक की फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाएं, 36 चिह्निïत स्थलों पर 18,000 मेगावॉट की पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं और व्यवहार्यता अंतर निधि से समर्थित 500 मेगावॉट-घंटा की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियां शामिल हैं। पवन ऊर्जा, वितरित नवीकरणीय ऊर्जा, लघु जलविद्युत, एग्री-वोल्टैक्स और वेस्ट-टू-एनर्जी क्षेत्रों में अवसर भी प्रस्तुत किए गए। ग्रिडको के प्रबंध निदेशक डॉ सत्यप्रिय रथ ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा नोडल एजेंसी (रेना) सेल परियोजनाओं को परिकल्पना से लेकर कमीशनिंग तक सुविधा प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा, हम पारदर्शी खरीद, सुनिश्चित ऑफटेक और समयबद्ध बोली प्रक्रियाओं के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऊर्जा विभाग की ओर से ग्रिडको ने निवेशकों और भागीदारों के साथ कुल पांच एमओयू पर हस्ताक्षर किए।