चौथी सीट के लिए हो सकता है बीजेडी से समझौता
भुवनेश्वर, (अनिल कुमार दास) : 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुनाव आयोजित होंगे। चुनाव आयोग ने पिछले बुधवार को इसकी जानकारी दी थी। अब राज्य की तीन प्रमुख राजनीतिक पार्टियां-भाजपा, बीजेडी और कांग्रेस-उम्मीदवार चयन को लेकर जोर-आजमाइश कर रही हैं। 16 मार्च को ओडिशा की चार सीटों के लिए मतदान होगा। अगर आंकड़ों को देखें तो दो सीटें भाजपा के खाते और एक सीट बीजेडी के खाते में जाने की संभावना है। हालांकि चौथी सीट जीतने को लेकर तीनों दलों में से किसी के पास आवश्यक विधायक नहीं हैं, इसलिए इस सीट को लेकर कौतुहल बना हुआ है।
उधर, कांग्रेस ने चौथी सीट के लिए अपना उम्मीदवार देने की घोषणा की है और बीजेडी से समर्थन मांगा है। उधर, बीजेडी ने इस सीट को लेकर अब तक कोई स्पष्ट रुख नहीं दिखाया है। दूसरी ओर, भाजपा तीन सीटें जीतने का दावा कर रही है। ऐसे में 7 तारीख को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। बताया जाता है कि अमित शाह सरकारी कार्यक्रम को लेकर ओडिशा आ रहे हैं। वे कटक के मुंडली स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) परिसर के स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे। इसके अलावा माओवाद-मुञ्चत ओडिशा के मुद्दे पर सीआरपीएफ अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे। इसके बाद वे पार्टी नेताओं के साथ राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर भी विचार-विमर्श करेंगे। इस दौरान वे चौथी सीट के लिए राजनीतिक चाल चलने आ रहे हैं। वे चौथी सीट को लेकर बीजेडी के साथ समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं।
चुनाव का कार्यक्रम
उल्लेखनीय है कि 5 मार्च राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है। देश भर में राज्यसभा की कुल 37 सीटों के लिए 26 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी होगा। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 9 मार्च तक उक्वमीदवार नामांकन वापस ले सकते हैं। 16 मार्च को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी। इसी दिन शाम 5 बजे से वोटों की गिनती होगी। 20 मार्च तक चुनाव की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। अब यहां यह देखना है कि पांच मार्च तक भाजपा और बीजेडी के कितने उक्वमीदवार नामांकन दाखिल करते हैं। भाजपा ने पहले से स्पष्टï कर दिया है कि वह तीन सीट पर जीत दर्ज करेगी, इसलिए उसका तीन सीटों पर उक्वमीदवार देना तय है। अब नजर बीजेडी पर रहेगी कि वह एक उक्वमीदवार उतारता है या दो को नामांकन दाखिल कराता है। अगर वह उक्वमीदवार देता है तो अमित शाह के साथ बात बनने पर नामांकन वापस कराया जा सकता है। कहा जा रहा है कि किसी भी परिस्थिति में कांग्रेस को विधानसभा में राजनीतिक चाल चलने का मौका न देने की रणनीति बनाई जा रही है।
नवीन पर रहेगी नजर
उधर, दूसरी ओर बीजेडी में आंतरिक कलह जारी है। बताया जा रहा है कि नवीन पटनायक अपने विधायकों को पूरी तरह नियंत्रित करने की स्थिति में नहीं हैं। पट्टामुंडई विधायक अरविंद महापात्र और चंपुआ विधायक सनातन महाकुड़ को बीजेडी से निलंबित किए जाने के बाद पार्टी में सब कुछ सामान्य नहीं कहा जा सकता। ऐसे में चर्चा है कि नवीन भी चौथी सीट के लिए शाह के साथ समझौते के इच्छुक हैं। यदि समझौता हो जाता है तो बीजेडी को वोट विभाजन की आशंका से राहत मिल सकती है। चौथी सीट के लिए उम्मीदवार देने को लेकर भी नवीन पर कोई अतिरिञ्चत दबाव नहीं रहेगा और पार्टी संभावित टूट से बच सकती है। यदि नामांकन के अंतिम दिन भाजपा तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा करती है और नवीन चौथे उम्मीदवार को समर्थन देने पर सहमत होते हैं, तो कांग्रेस उम्मीदवार दे या न दे, कोई विशेष फर्क नहीं पड़ेगा। बीजेडी के वे विधायक जो अंदरूनी समीकरणों के तहत भाजपा या कांग्रेस के पक्ष में मतदान की योजना बना रहे होंगे, उनकी रणनीति भी विफल हो सकती है। बताया जा रहा है कि नवीन एक बड़ा राजनीतिक दांव चलना चाहते हैं।
शाह के दौरे को लेकर हलचल तेज
नामांकन वापसी से दो दिन पहले अमित शाह का ओडिशा दौरा बीजेडी और भाजपा दोनों खेमों में हलचल पैदा कर चुका है। उल्लेखनीय है कि आम चुनाव से एक वर्ष पहले, 5 अगस्त 2023 को भी शाह ओडिशा दौरे पर आए थे। उस समय कोई दलगत कार्यक्रम नहीं था। वे राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार से जुड़े एक कार्यक्रम में लोकसेवा भवन में शामिल हुए थे। इसके बाद वे सीधे एक होटल पहुंचे और वीके पांडियन से गोपनीय चर्चा की थी। उस समय चर्चा थी कि नवीन पटनायक समय से पहले विधानसभा भंग करने की योजना बना रहे थे, लेकिन राष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियां भाजपा के अनुकूल न होने के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ी। बीजेडी और भाजपा के बीच 2024 के आम चुनाव को लेकर गठबंधन की चर्चाएं भी तेज हुई थीं। इसके लिए पांडियन ने कई बार दिल्ली का दौरा कर अमित शाह से मुलाकात की थी। राज्य और राष्ट्रीय मीडिया में भी बीजेडी-भाजपा गठबंधन को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। हालांकि अंतत: भाजपा ने ओडिशा में अकेले चुनाव लड़कर बीजेडी को सत्ता से बाहर कर दिया। ऐसे में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले अमित शाह के आगमन पर सबकी नजर टिकी है।