भुवनेश्वर, (निप्र) : शहरी क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से आवास एवं शहरी विकास विभाग ने ओडिशा फायर सर्विस के साथ मिलकर फायर सेफ्टी जागरुकता और तैयारियों पर एक उच्चस्तरीय वर्चुअल कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों के बीच आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को समन्वित करना और तकनीकी तैयारियों को सुदृढ़ बनाना रहा। फायर सर्विसेज के महानिदेशक डॉ सुधांशु षड़ंगी ने तकनीकी सत्र में आग से बचाव के उपाय, आधुनिक अग्निशमन उपकरणों के उपयोग और संस्थागत तैयारी के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यापक पहल करने वाला यह राज्य का पहला विभाग है, जिसने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का नया मानक स्थापित किया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आगामी शनिवार को पूरे राज्य में फायर सेफ्टी पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी और सभी शहरी निकायों से इसमें सक्रिय सहयोग की अपील की। आवास एवं शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में फायर सेफ्टी को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि शहरी प्रशासन का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।
उन्होंने निर्देश दिया कि आगामी वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना (एमएसबीवाई) के तहत फायर सेफ्टी उपायों को शामिल किया जाए। कार्यशाला में सभी नगर निगमों के आयुञ्चत, नगरपालिकाओं और अधिसूचित क्षेत्र परिषदों (एनएसी) के कार्यपालक अधिकारी, साथ ही फायर ऑफिसर और डिप्टी फायर ऑफिसर वर्चुअल रूप से शामिल हुए। हाल के अग्निकांडों को देखते हुए कार्यशाला में सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। चर्चा तीन प्रमुख बिंदुओं-तैयारी, रोकथाम और जन-जागरुकता-पर केंद्रित रही।
बैठक में कई प्रमुख निर्णय लिए गए जिनमें अधिकारियों और आम नागरिकों को लगातार संवेदनशील बनाकर सार्वजनिक और निजी संस्थानों की नियमित सुरक्षा जांच अनिवार्य करना, आग से बचाव और आपातकालीन प्रतिक्रिया पर जमीनी स्तर पर जागरुकता अभियान चलाना शामिल हैं। शुरुआत में नगर प्रशासन निदेशक अरिंदम डाकुआ ने बैठक का एजेंडा प्रस्तुत करते हुए राज्यव्यापी समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला के अंत में सभी शहरी निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों में तुरंत सुरक्षा ऑडिट और जागरुकता अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए, ताकि भविष्य में किसी भी दुर्घटना को रोका जा सके।