भुवनेश्वर, (निप्र) : वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच ओडिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। मोस्ट वांटेड माओवादी नेता शुक्रू ने मंगलवार को कंधमाल जिले में आत्मसमर्पण कर दिया। उसके साथ चार अन्य माओवादियों ने भी हथियार डाल दिए। ओडिशा पुलिस के एंटी-नक्सल एडीजी संजीब पंडा ने इस घटना की आधिकारिक पुष्टि की है। शुक्रू लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था और कंधमाल जिले में सक्रिय एक प्रमुख माओवादी नेता माना जाता था। उसके सिर पर 55 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
सूत्रों के अनुसार, शुक्रू ने एके-47 राइफल के साथ सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण किया, जिसे राज्य में चल रहे माओवादी विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले कई दिनों से सुरक्षा बल कलाहांडी-कंधमाल-रायगड़ा सीमा के घने जंगलों में शुक्रू को पकडऩे के लिए व्यापक अभियान चला रहे थे। ड्रोन निगरानी के जरिए उसके मूवमेंट पर नजर रखी जा रही थी। अधिकारियों ने 31 मार्च तक उसे पकडऩे का लक्ष्य तय किया था, लेकिन समयसीमा से पहले उसका सरेंडर होना बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
मालकानगिरी जिले का निवासी शुक्रू कंधमाल और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय था। वह ‘एठवीं कंपनी’ नाम से एक नए संगठन का नेतृत्व कर रहा था, जिससे क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को फिर से संगठित करने की कोशिश की जा रही थी। गौरतलब है कि शुक्रू पर हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कमांडर अन्वेष की हत्या का भी आरोप है। बताया जाता है कि अन्वेष की गला रेतकर हत्या की गई थी और शव को शुक्रू व उसके साथियों ने दफना दिया था।
शुक्रू के आत्मसमर्पण के बाद सुरक्षा अधिकारियों और विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में माओवाद के प्रभाव के अंत की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। 31 मार्च तक माओवादी मुक्त क्षेत्र बनाने के लक्ष्य के बीच यह सफलता अभियान को और मजबूती देगी।