48 साल बाद हो रही प्रक्रिया
पुरी, (निप्र) : पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की सूचीकरण और गणना प्रक्रिया का दूसरा चरण बुधवार से शुरू हो गया। यह कार्य चरणबद्ध तरीके से 11 अप्रैल तक चलेगा, जिसके बाद 13 और 16 से 18 अप्रैल के बीच अगले सत्र आयोजित किए जाएंगे।
अधिकारियों के अनुसार, सेवकों, रत्न विशेषज्ञों और सुनारों की एक चयनित टीम ने रत्न भंडार समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ और मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक डा अरबिंद पाढ़ी की उपस्थिति में पूर्वाह्न 11:30 बजे रत्न भंडार में प्रवेश किया।
गौरतलब है कि देवी-देवताओं के दैनिक उपयोग के आभूषणों की सूची तैयार करने का कार्य 48 वर्षों में पहली बार 25 मार्च से शुरू हुआ था। पहले चरण में पूरी प्रक्रिया को पारदर्शिता के लिए वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और 3डी मैपिंग के माध्यम से रिकॉर्ड किया गया। साथ ही आभूषणों की डिजिटल सूची तैयार कर उन्हें धातु के आधार पर अलग-अलग संदूकों में सुरक्षित रखा गया।
वर्तमान चरण में बाहरी रत्न भंडार पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जहां त्योहारों में उपयोग होने वाले आभूषण और गहने रखे जाते हैं। इसमें रथ यात्रा और अन्य विशेष अवसरों पर उपयोग किए जाने वाले प्रसिद्ध 'सुना भेषÓ (स्वर्ण आभूषण) भी शामिल हैं। वर्ष 1978 की सूची के अनुसार रत्न भंडार में कुल 111 वस्तुएं दर्ज हैं, जिनमें 78 सोने और 33 चांदी से संबंधित हैं। इस दौरान मंदिर के अनुष्ठान बिना किसी बाधा के जारी रहेंगे, हालांकि सुरक्षा कारणों से श्रद्धालु केवल बाहरी बैरिकेड (काठा) से ही दर्शन कर सकेंगे। गणना के दौरान गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा, लेकिन बाहरी गर्भगृह से दर्शन की व्यवस्था बनी रहेगी। मंदिर प्रशासन ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया है, ताकि हर चरण का सही दस्तावेजीकरण किया जा सके। प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित हिस्सों के पुनर्स्थापन का कार्य भी किया जाएगा।