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Sunday, Apr 12, 2026
Published on: Friday, April 10, 2026
राज्य

मंत्रिमंडल ने 11 प्रस्तावों को दी मंजूरी, सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना होगी मजबूत


3,400 करोड़ की लागत से अटल बस स्टैंड योजना को हरी झंडी
 
भुवनेश्वर, (निप्र) : मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई ओडिशा मंत्रिमंडल बैठक में पांच विभागों से जुड़े कुल 11 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद मुख्य सचिव अनु गर्ग ने इन फैसलों की जानकारी दी। कैबिनेट ने प्रमुख रूप से पार्वती गिरि मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना पर विशेष जोर दिया, जिसे राज्य में जल संसाधन ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों के तहत प्राथमिकता दी गई है। इसके साथ ही 3,400 करोड़ रुपये की लागत वाली अटल बस स्टैंड योजना को भी मंजूरी दी गई।
 
इस योजना का उद्देश्य राज्य में सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना को सुदृढ़ करना है। इसके तहत ओडिशा के 318 बस स्टैंडों का उन्नयन किया जाएगा, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और परिवहन संपर्क मजबूत होगा। कैबिनेट बैठक में राज्यभर के बस स्टैंडों के आधुनिकीकरण के लिए 3,400 करोड़ रुपये की ‘अटल बस स्टैंड’ योजना को मंजूरी दी गई है। यह योजना वित्तीय वर्ष 2031-32 तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन ढांचे को आधुनिक और व्यवस्थित बनाना है।
 
इस योजना के तहत जिला मुख्यालय, उपखंड, ब्लॉक मुख्यालय, शहरी निकायों तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों पर स्थित बस स्टैंडों का नवीनीकरण, संचालन और प्रबंधन किया जाएगा। राज्य के सभी बस स्टैंडों को एक ही ढांचे के तहत लाकर उनके विकास और रखरखाव में एकरूपता सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने बस स्टैंडों को ए, बी और सी श्रेणियों में विभाजित करने का निर्णय लिया है, जिससे यात्रियों की संख्या और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार सुविधाओं का विकास किया जा सके।
 
इससे स्थानीय जरूरतों के अनुरूप निवेश और बेहतर प्रबंधन संभव होगा। योजना का उद्देश्य यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाना, संचालन दक्षता बढ़ाना और राजस्व सृजन को मजबूत करना है। साथ ही पर्यावरण अनुकूल अवसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस योजना को ओडिशा राज्य सड़क परिवहन कार्पोरेशन के माध्यम से वाणिज्य एवं परिवहन विभाग द्वारा लागू किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से राज्य में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
 
श्रम सेवा नियमों में बदलाव को दी मंजूरी
 
मंत्रिमंडल ने ओडिशा श्रम सेवा नियम, 2019 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस फैसले से 2019 से पहले नियुक्त सहायक श्रम अधिकारी (एएलओ) और ग्रामीण श्रम निरीक्षकों (आरएलआई) को बड़ी राहत मिलेगी। संशोधित नियमों के तहत अब इन अधिकारियों को विभागीय परीक्षा से छूट दी जाएगी, जिससे उनके सेवा नियमितीकरण और पदोन्नति का मार्ग आसान होगा। कैबिनेट ने विभागीय परीक्षा के पाठ्यक्रम में भी बदलाव करते हुए केंद्रीय आपराधिक कानूनों के नए संस्करण शामिल किए हैं।
 
इसके तहत भारतीय दंड संहिता, 1860 की जगह भारतीय न्याय संहिता, 2023, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 को शामिल किया गया है। इसके अलावा, कैबिनेट ने ओडिशा कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) योजना के मंत्रिस्तरीय सेवा नियम, 2026 को भी मंजूरी दी है।
 
नए नियमों के तहत राज्यभर के ईएसआई अस्पतालों और डिस्पेंसरी में कार्यरत कर्मचारियों की भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तों को व्यवस्थित किया जाएगा। साथ ही, ईएसआई मेडिकल सेवा नियम, 2014 में संशोधन को भी मंजूरी दी गई है, जिससे भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और श्रम व स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर सुधार होगा।
 
केंदुझर में जीआईएस सब-स्टेशन को मिली मंजूरी
 
बढ़ती औद्योगिक बिजली मांग को देखते हुए कैबिनेट ने केंदुझर जिले के बसुदेवपुर में 2 गुना 500 एमवीए, 400/220/33 केवी जीआईएस सब-स्टेशन और संबंधित ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण को भी मंजूरी दी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1,647 करोड़ रुपये है, जिसमें ओडिशा सरकार की ओर से 494.10 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता दी जाएगी। यह प्रस्ताव ओडिशा पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा दिया गया था। जोड़ा-बड़बिल-पलासपंगा क्षेत्र, जो राज्य के सबसे खनिज समृद्ध क्षेत्रों में से एक है, में कई ऊर्जा-गहन उद्योग स्थित हैं। यहां के मौजूदा ग्रिड सब-स्टेशन पूरी क्षमता पर चल रहे हैं, जिससे अतिरिक्त अवसंरचना की आवश्यकता महसूस की जा रही है। 
 
पार्वती गिरि मेगा योजना के तहत लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी
 
कैबिनेट बैठक में पार्वती गिरि मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना के तहत कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। जल संसाधन विभाग के अनुसार, इस योजना की कुल अनुमानित लागत 10,759.20 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य राज्य के लगभग 2,63,801 हेक्टेयर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खरीफ फसल के लिए अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।
 
इसके लिए नदियों, जलाशयों और नहरों से अतिरिक्त पानी का उपयोग किया जाएगा। वर्तमान प्रस्ताव के तहत जाजपुर जिले में क्लस्टर-37 के अंतर्गत चार लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से 5,950 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित होगी। इसके लिए खरसुआ और ब्राह्मणी नदियों से पानी उठाकर पाइपलाइन के माध्यम से वितरण किया जाएगा। इस परियोजना की स्वीकृत लागत (जीएसटी को छोड़कर) 158.87 करोड़ रुपये है।
 
इसके अलावा, 15 वर्षों के संचालन और रखरखाव के लिए 12.71 करोड़ रुपये की लागत को भी मंजूरी दी गई है। परियोजना को 36 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के पूरा होने पर जाजपुर जिले के 73 गांवों के किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि माइक्रो-इरिगेशन सुविधाओं के आने से किसान पारंपरिक धान की खेती से हटकर अधिक लाभकारी नकदी फसलों की ओर रुख करेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
 
ग्रामीण पेयजल व्यवस्था होगी मजबूत 
 
 कैबिनेट बैठक में ग्रामीण पेयजल आपूर्ति के लिए संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) नीति-2026 को मंजूरी दी गई है। इस नीति का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति को दीर्घकालिक रूप से सुचारू, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। नई नीति के तहत जलापूर्ति प्रणालियों के नियमित रखरखाव, पानी की गुणवत्ता की निगरानी और परिसंपत्तियों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों और जल एवं स्वच्छता समितियों की भूमिका को मजबूत कर सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया है।
 
नीति में उपयोगकर्ता शुल्क व्यवस्था, गांव स्तर पर ओ एंड एम फंड की स्थापना, नियमित जल परीक्षण और एसएसीएडीए व आईओटी आधारित डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए एक केंद्रीय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह नीति ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को स्थायी रूप से पूरा करने में मदद करेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाएगी।

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