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Thursday, Feb 12, 2026
Published on: Wednesday, February 11, 2026
राज्य

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री पात्र ने केंद्रीय मंत्री डा सिंह से की मुलाकात


भुवनेश्वर, (निप्र) : ओडिशा की वैज्ञानिक अवसंरचना और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कृष्णचंद्र पात्र ने नई दिल्ली में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डा जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में ओडिशा के क्षेत्रीय वैज्ञानिक लक्ष्यों को केंद्र सरकार के राष्ट्रीय मिशनों के साथ जोडऩे और राज्य के प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए विकास मॉडल पर विशेष रूप से चर्चा हुई।
 
बैठक के दौरान पात्र ने भुवनेश्वर में एक विश्वस्तरीय विज्ञान सिटी की स्थापना के लिए केंद्र सरकार से सहयोग मांगा। राज्य सरकार पहले ही भुवनेश्वर के बाहरी इलाके में इस परियोजना के लिए 100 एकड़ भूमि चिन्हित कर चुकी है। यह विज्ञान सिटी आधुनिक प्रदर्शनों और अनुभवात्मक शिक्षण स्थलों से युक्त एक इंटरैक्टिव केंद्र के रूप में विकसित की जाएगी, जिसका उद्देश्य युवाओं को विज्ञान के प्रति प्रेरित करना है। दोनों मंत्रियों ने स्पेस इनोवेशन हब की स्थापना पर भी चर्चा की, जिसका मकसद स्टार्टअप्स और अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इस पहल के तहत ओडिशा स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (ओआरएसएसी) तथा वीएसएसयूटी, बुरला जैसे मौजूदा शोध संस्थानों की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग कर ओडिशा को सैटेलाइट डेटा अनुप्रयोगों और स्पेस-टेक उद्यमिता में अग्रणी बनाने की योजना है।
 
राष्ट्रीय बायो-ई3 नीति के अनुरूप, ओडिशा में बायो ई-सेल्स शुरू करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। ये सेल्स उच्च प्रदर्शन वाले जैव-निर्माण, पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने और शोध संस्थानों को प्रयोगशाला अनुसंधान को व्यावहारिक जैव-प्रौद्योगिकी उत्पादों में बदलने में सहायता करेंगी। इसके अलावा, राज्य में विज्ञान विकास को प्रोत्साहित करने से जुड़े अन्य विषयों पर भी चर्चा की गई। मंत्री पात्र ने निरंतर मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग के लिए केंद्रीय मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य और केंद्र के बीच यह समन्वय ओडिशा को भारत का एक प्रमुख वैज्ञानिक और औद्योगिक केंद्र बनाने की नींव साबित होगा। वहीं, डा सिंह ने राज्य सरकार की सक्रिय पहल की सराहना करते हुए 'विकसित भारतÓ के विजन में ओडिशा की वैज्ञानिक प्रगति को महत्वपूर्ण बताया और इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए पूर्ण तकनीकी व वित्तीय सहयोग का आश्वासन दिया।

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