भुवनेश्वर, (निप्र) : विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजद) ने शनिवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर ओडिशा को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के पुराने वादे को पूरा न करने का आरोप लगाते हुए हमला तेज कर दिया।
भुवनेश्वर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बीजद के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्र ने कहा कि भाजपा की 2014 के घोषणा पत्र में ओडिशा को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने का वादा किया गया था, ताकि राज्य के विकास को गति मिल सके। पात्र ने आरोप लगाया कि राज्य में लगभग दो वर्ष से सत्ता में होने के बावजूद भाजपा इस मुद्दे पर कोई ठोस प्रगति नहीं कर सकी है। उन्होंने संसद में दिए गए हालिया बयानों का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार के पास फिलहाल ओडिशा को विशेष राज्य का दर्जा देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उनके अनुसार, इससे भाजपा के 'डबल इंजनÓ शासन के दावे पर सवाल खड़े होते हैं।
बीजद नेता ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से मांग की कि केंद्र पर दबाव बनाने के लिए कैबिनेट में औपचारिक प्रस्ताव पारित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह मांग केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक और विकासात्मक चुनौतियों से जुड़ा हुआ विषय है। पात्र ने कहा कि ओडिशा के सामाजिक-आर्थिक आंकड़े इस मांग को मजबूत करते हैं। राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 और बहुआयामी गरीबी सूचकांक का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि गरीबी में कमी आई है, लेकिन कुपोषण, स्वच्छ ईंधन की सीमित उपलब्धता और स्वच्छता ढांचे की कमी जैसी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।
फिलहाल राज्य में गरीबी दर 15.68 प्रतिशत है, जो प्रगति के साथ-साथ चुनौतियों की ओर भी संकेत करती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की कुल आबादी में अनुसूचित जनजाति की हिस्सेदारी 22.8 प्रतिशत और अनुसूचित जाति की लगभग 17 प्रतिशत है, जिन्हें निरंतर विकासात्मक सहयोग की आवश्यकता है। इसके अलावा, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की लगातार मार से राज्य की वित्तीय स्थिति और बुनियादी ढांचे पर दबाव पड़ता है, जो केंद्र से अतिरिक्त सहायता की जरूरत को मजबूत करता है। गौरतलब है कि भाजपा ने 12 जून 2024 को ओडिशा में सत्ता संभाली थी, जिससे पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व में बीजद का 24 वर्षों का शासन समाप्त हुआ। 4 जून को हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 147 सदस्यीय सदन में 78 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी और बाद में दो निर्दलीय विधायकों ने भी पार्टी को समर्थन दिया था।