बरगढ़, (निप्र) : संसद के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में ओडिशा, विशेषकर कोशलांचल, केबीके (कोरापुट-बलांगीर-कालाहांडी) क्षेत्र और दक्षिण ओडिशा से अन्य राज्यों में पलायन करने वाले दादन (प्रवासी) श्रमिकों की सुरक्षा, समान, मजदूरी और उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर केंद्र सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग उठायी। राज्यसभा सांसद निरंजन बिशी ने सदन में कहा कि गरीबी, बेरोजगारी, बाढ़, सूखा और प्राकृतिक आपदाओं के कारण ओडिशा से 10 लाख से अधिक श्रमिक आजीविका के लिए देश के विभिन्न राज्यों में पलायन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ये श्रमिक ईंट-भट्टों, फैक्ट्रियों और निर्माण कार्यों में 16 से 18 घंटे तक कठिन परिश्रम करने को मजबूर हैं। सांसद ने चिंता जताई कि विभिन्न राज्यों में अब तक ओडिशा के 500 से अधिक श्रमिकों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन कई मामलों में मृतकों के परिजनों को न तो उचित मुआवजा मिल रहा है और न ही मामलों की पारदर्शी जांच हो रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम और न्यूनतम मजदूरी कानून होने के बावजूद उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि अधिकांश प्रवासी श्रमिकों का पंजीकरण नहीं होता, पहचान पत्र नहीं दिए जाते और राशन, स्वास्थ्य सुविधा व बीमा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वे वंचित रहते हैं। महिला एवं बाल श्रमिकों के शोषण और उत्पीडऩ पर भी उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की। निरंजन बिशी ने कहा कि श्रमिक देश की रीढ़ हैं। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, सड़क, पुल और उद्योगों का निर्माण वही करते हैं, लेकिन वही सबसे अधिक असुरक्षित और उपेक्षित हैं। यह केवल श्रमिकों का नहीं, बल्कि मानवाधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने केंद्र सरकार से श्रम कानूनों का सक्चती से पालन सुनिश्चित करने, राष्ट्रीय श्रमिक पंजीकरण प्रणाली लागू करने, 'एक राष्ट्र-एक राशन कार्डÓ योजना को प्रभावी बनाने, आयुष्मान भारत और बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना का लाभ प्रवासी श्रमिकों तक पहुंचाने, तथा महिला व बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने ओडिशा, पश्चिम ओडिशा, केबीके और दक्षिण ओडिशा में स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाकर दादन श्रमिक समस्या के स्थायी समाधान पर जोर दिया।