भुवनेश्वर, (निप्र) : महाप्रभु श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे सोने के आभूषणों और बहुमूल्य रत्नों की गिनती और सूचीकरण का कार्य बहुत जल्द शुरू होगा। आज लोक सेवा भवन में मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में यह जानकारी दी गई।
पुरी श्रीमंदिर के मुख्य प्रशासक डॉ अरविंद पाढ़ी ने इस संबंध में मुख्यमंत्री के सामने विस्तृत प्रस्तुति रखी। बताया गया कि गिनती और सूचीकरण से जुड़ी सभी पूर्व प्रक्रियाएँ पूरी कर ली गई हैं। बाहरी और आंतरिक रत्न भंडार की संपूर्ण मरम्मत और संरक्षण का कार्य भी पूरा हो चुका है। यह पूरा कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा 95 दिनों और 333 घंटे के काम में संपन्न किया गया है। अब गिनती और सूचीकरण के लिए श्रीमंदिर प्रशासन और राज्य सरकार पूरी तरह तैयार हैं।
बैठक में बताया गया कि गिनती और सूचीकरण की पूरी प्रक्रिया के लिए एसओपी श्रीमंदिर प्रबंधन समिति द्वारा तैयार की गई है। सरकार की मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरी पारदर्शिता के साथ इस प्रक्रिया को संपन्न किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि अंतिम बार गिनती और सूचीकरण का कार्य वर्ष 1978 में हुआ था। इसलिए वर्तमान प्रक्रिया के दौरान संपत्तियों की गिनती करते समय 1978 की सूची से उसका मिलान कर अंतिम सूची तैयार की जाएगी। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी के साथ डिजिटल कैटलॉग भी तैयार किया जाएगा।
बैठक में इस वर्ष की रथयात्रा की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। महाप्रभु की रथयात्रा के लिए फासी लकड़ी और चंदन लकड़ी की अधिक आवश्यकता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने वन परियोजना के माध्यम से इन पेड़ों के रोपण का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में लोक निर्माण एवं कानून मंत्री श्री पृथ्वीराज हरिचंदन, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री प्रकाश मिश्रा, मुख्य सचिव श्रीमती अनु गर्ग, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री शाश्वत मिश्रा, कानून विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. पवित्र मोहन सामल तथा पुरी के जिला कलेक्टर श्री दिव्यज्योति परिड़ा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।