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Thursday, Feb 26, 2026
Published on: Wednesday, February 25, 2026
राज्य

मार्च के पहले हफ्ते से शुरू होगी रत्न भंडार की सूचीकरण प्रक्रिया : कानून मंत्री


 
भुवनेश्वर, (निप्र) : प्रदेश के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी श्रीमंदिर के रत्न भंडार की सूची (इन्वेंट्री) मार्च के पहले सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। मंत्री के अनुसार, इस संबंध में छत्‍तीसा निजोग के साथ चर्चा हो चुकी है और सभी जरूरी पहलुओं पर विचार के बाद अंतिम तारीख जल्द घोषित की जाएगी। हरिचंदन ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी मंदिर प्रबंधन समिति और मंदिर प्रशासन को सौंपी गई है।
 
सूचीकरण की तारीख देवताओं की परंपरागत नीतियों और अनुष्ठानों को ध्यान में रखकर तय की जाएगी, ताकि नियमित नीति और दर्शन व्यवस्था बाधित न हो। सभी कारकों की समीक्षा के बाद तारीख तय होगी। इससे पहले ओडिशा सरकार ने रत्न भंडारों की नई सूचीकरण प्रक्रिया के लिए 14 पन्नों की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को मंजूरी दी है। इसके तहत दो उच्चस्तरीय पैनल गठित किए जाएंगे-एक पैनल पूरे कार्य की निगरानी करेगा, जबकि दूसरा पैनल आभूषणों की गिनती और दस्तावेजीकरण का कार्य संभालेगा। दोनों पैनलों का नेतृत्व मुख्य प्रशासक करेंगे।
 
 
दिशानिर्देशों के अनुसार चलंती भंडार और बाहरी रत्न भंडार की सूची मजिस्ट्रेट और नामित मंदिर अधिकारियों की मौजूदगी में तैयार की जाएगी। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी और विवरण डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित रखा जाएगा। भीतर रत्न भंडार का सूचीकरण कड़े पर्यवेक्षण में होगा-तीन सदस्यीय निगरानी समिति प्रक्रिया देखेगी और 10 सदस्यीय हैंडलिंग टीम आभूषणों का वर्गीकरण कर व्यवस्थित रखेगी। सोना, चांदी और अन्य आभूषणों के लिए अलग-अलग विशेष संदूक तैयार किए गए हैं, जिन पर अंदर रखी वस्तुओं का विस्तृत विवरण दर्ज होगा। इस प्रक्रिया में भारतीय रिजर्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से नामित स्वर्णकार और सरकार द्वारा नामित रत्न विशेषज्ञ शामिल होंगे।
 
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आभूषणों का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा, हालांकि उनमें लगे कीमती और अर्ध-कीमती पत्थरों की श्रेणी और विवरण दर्ज किया जाएगा। यह मसौदा प्रस्ताव मंदिर की विधि उपसमिति ने 1978 में अपनाई गई पद्धति का अध्ययन कर तैयार किया है और अंतिम रूप से कार्यक्रम तय करने के लिए इसे मंदिर प्रबंधन समिति के समक्ष रखा जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सूचीकरण अवधि के दौरान देवताओं के दर्शन जारी रहेंगे। श्रद्धालुओं को दूरी से दर्शन की अनुमति होगी और विशेष अनुष्ठान व बड़े त्योहारों के दिनों से बचते हुए तारीखें तय की जाएंगी।
 

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