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Monday, Mar 2, 2026
Published on: Sunday, March 01, 2026
राज्य

महानदी ट्रिब्यूनल के सदस्यों ने श्रीमंदिर में महाप्रभु के किए दर्शन


ट्रिब्यूनल सदस्यों के ओडिशा दौरे से राज्य को मिलेगा लाभ : एडवोकेट जनरल
पुरी, (निप्र) : महानदी जल विवाद के समाधान के लिए गठित ट्रिब्यूनल का ओडिशा दौरा राज्यवासियों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। यह बात ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य ने कही। रविवार को महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी के नेतृत्व में सदस्य न्यायमूर्ति डा रवि रंजन तथा न्यायमूर्ति इंदरमीत कौर कोचर पुरी पहुंचे। इस दौरान एडवोकेट जनरल आचार्य भी उनके साथ उपस्थित रहे।
 
पुरी के जिलाधिकारी दिव्य ज्योति परिडा एवं पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह ने ट्रिब्यूनल के सदस्यों का स्वागत किया। इसके पश्चात ट्रिब्यूनल के सदस्यों ने श्रीजगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु के दर्शन किए। मीडिया से बातचीत करते हुए एडवोकेट जनरल आचार्य ने कहा कि महानदी जल विवाद के समाधान के लिए ट्रिब्यूनल द्वारा संबंधित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण एवं वास्तविक स्थिति का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व गठित आयोग वर्ष 2023 में भी ओडिशा के सात से आठ दिनों के दौरे पर आया था।
 
वर्तमान दौरे के दौरान ट्रिब्यूनल ने हीराकुद जलाशय, हीराकुद बांध तथा बुर्ला पावर चैनल का निरीक्षण किया। राज्य सरकार की ओर से तकनीकी दल द्वारा तैयार तथ्यों को पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से ट्रिब्यूनल के समक्ष रखा गया। इस मौके पर पर हेलीकॉप्टर के माध्यम से महानदी के डेल्टा क्षेत्र एवं बांध के निचले इलाकों की वास्तविक स्थिति भी ट्रिब्यूनल को दिखाई गई। ट्रिब्यूनल ने सातकोसिया घाटी सहित बरगढ़, सोनपुर और कटक जिलों के उन क्षेत्रों का भी नीरिक्षण किया, जहां से महानदी प्रवाहित होती है। आचार्य ने कहा कि किसी भी न्यायिक प्रक्रिया में प्रत्यक्ष निरीक्षण से ही वास्तविक परिस्थितियों की सही जानकारी मिलती है।
 
उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल द्वारा ओडिशा एवं छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों की भौगोलिक स्थिति और हितों का अध्ययन किया जा रहा है। हीराकुद जलाशय, सातकोसिया घाटी और चिलिका झील महानदी प्रणाली से गहराई से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन क्षेत्रों का निरीक्षण महत्वपूर्ण है। एडवोकेट जनरल ने आशा व्यञ्चत करते हुए कहा कि यद्यपि पूर्व में गठित कई जल विवाद ट्रिब्यूनल अंतिम समाधान देने में सफल नहीं हो सके, फिर भी महानदी विवाद का समाधान अवश्य निकलेगा और यह भविष्य में एक सफल उदाहरण के रूप में स्थापित होगा। इस दौरान जल संसाधन विभाग की प्रमुख सचिव शुभा शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने दौरे से संबंधित व्यवस्थाओं का संचालन किया। 

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