कटक, (निप्र) : उड़ीसा उच्च न्यायालय ने विशेष ओडिशा शिक्षक पात्रता परीक्षा (ओटीईटी) प्रश्नपत्र लीक मामले में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (बीएसई) के पूर्व उपाध्यक्ष निहार रंजन मोहंती सहित आठ आरोपियों को जमानत दे दी है। निहार रंजन मोहंती के अलावा अदालत ने डेटा एंट्री ऑपरेटर जीतन महारणा, रामजी प्रसाद गुप्ता, बिजय कुमार मिश्र, जयंत कुमार राउत, अजय कुमार साहू, प्रशांत कुमार खमारी और सनातन बिशोई को भी जमानत प्रदान की है।
अदालत ने यह जमानत कुछ शर्तों के साथ दी है। आरोपियों को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने और बिना अनुमति देश छोड़कर न जाने का निर्देश दिया गया है। यह मामला विशेष ओटीईटी परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के कथित रूप से लीक होने से जुड़ा है। इस मामले की जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने पहले इन आठों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान क्राइम ब्रांच को मुख्य आरोपियों जीतन महारणा और बिजय मिश्र से पूछताछ में महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी।
जांचकर्ताओं के अनुसार, परीक्षा से पहले महारणा ने एक पेन ड्राइव के माध्यम से बीएसई के उपाध्यक्ष के लैपटॉप से प्रश्नपत्र प्राप्त किए थे। इसके बाद उसने कथित तौर पर प्रश्नपत्रों की प्रिंट कॉपी निकाली और उन्हें नयागढ़ ले गया, जहां उन्हें मिश्र के भाई को सौंप दिया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसके बाद मिश्र ने यूपीआई के माध्यम से महारणा को 2.5 लाख रुपये स्थानांतरित किए थे। बाद में लीक हुए प्रश्नपत्रों को रायगढ़ा जिले के अम्बोडाला भेजा गया।
वहां भवानीपटना के पास भेजीपदर स्थित एक सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक प्रशांत कुमार खमारी ने कथित तौर पर प्रश्नों का गूगल ट्रांसलेट की मदद से अनुवाद किया और लीक को छिपाने के लिए उन्हें हाथ से दोबारा लिख दिया। जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने कई अन्य लोगों से भी पूछताछ की थी, जिनमें मिश्र के भाई, महारणा के साथ जाने वाला चालक और बीएसई उपाध्यक्ष के कार्यालय में कार्यरत एक महिला डेटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं। उनसे यह पता लगाने की कोशिश की गई कि लैपटॉप तक पहुंच कैसे मिली और यह गतिविधि बिना किसी की नजर में आए कैसे होती रही।