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  • विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ चरित्र का भी विकास करें शिक्षक : राज्यपाल
Monday, Mar 30, 2026
Published on: Sunday, March 29, 2026
राज्य

विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ चरित्र का भी विकास करें शिक्षक : राज्यपाल


 
शांतिपूर्ण व प्रगतिशील समाज के निर्माण में मूल्य-आधारित शिक्षा महत्वपूर्ण 
 
भुवनेश्वर, (निप्र) : शांतिपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण में मूल्य-आधारित शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह बात राज्यपाल डॉ हरि बाबू कंभमपति ने कही। रविवार को भुवनेश्वर स्थित रामकृष्ण मिशन के विवेकानंद हॉल में आयोजित शिक्षकों के लिए मूल्य-आधारित शिक्षा विषयक कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल ने यह बात कही। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षकों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ चरित्र का भी विकास करें।
 
 स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा केवल सूचना एकत्र करना नहीं है, बल्कि आंतरिक पूर्णता, शक्त‍ि और चरित्र का विकास है। उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं और शिक्षा, समाजसेवा तथा आध्यात्मिक जागरण में रामकृष्ण मिशन के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरित होकर रामकृष्ण मिशन निरंतर संतुलित शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा दे रहा है, जो बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास को समन्वित करती है।
 
 भारत की समृद्ध सभ्यता का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारतीय मूल्यों में सत्य, धर्म, शांति, प्रेम और अहिंसा का समावेश है। ये केवल आदर्श नहीं हैं, बल्कि दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाले सिद्धांत हैं। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संघर्ष और अस्थिरता के इस दौर में आपसी समझ, सहिष्णुता और संवाद को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षक मार्गदर्शक और राष्ट्र निर्माता के रूप में युवाओं के मन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 
 
राज्यपाल ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को विचारों में निर्भीक, व्यवहार में दयालु और मानवता की सेवा के प्रति समर्पित बनने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि एक बदला हुआ व्यक्त‍ि भी समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मूल्य केवल पुस्तकों से नहीं सिखाए जा सकते, बल्कि उन्हें जीवन में अपनाना और अनुभव करना आवश्यक है। शिक्षकों को स्वयं के विकास के लिए प्रयासरत रहने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि संस्थानों को ऐसा वातावरण बनाना चाहिए, जो नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा भावना को बढ़ावा दे। 
 
राज्यपाल ने कहा कि वास्तविक राष्ट्रीय शक्ति केवल आर्थिक प्रगति में नहीं, बल्कि नागरिकों के चरित्र में निहित होती है। कार्यक्रम में रामकृष्ण मठ, हैदराबाद के संपादक स्वामी बोधमयानंद ने भी संबोधित किया। रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी आत्मप्रभानंद ने स्वागत भाषण दिया, जबकि अध्यक्ष डॉ चंडी दास ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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