भुवनेश्वर, (निप्र) : राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के लिए आरक्षण बढ़ाने के साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) के लिए मेडिकल व तकनीकी शिक्षा में नया आरक्षण लागू किया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया, एसटी छात्रों का आरक्षण 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 22.5 प्रतिशत और एससी का आठ प्रतिशत से बढ़ाकर 16.25 प्रतिशत किया गया है, जबकि ओबीसी (ओडिशा में एसईबीसी) के लिए 11.25 प्रतिशत आरक्षण पहली बार लागू किया गया है।
उन्होंने बताया कि यह नई व्यवस्था विश्वविद्यालयों, संबद्ध कॉलेजों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक तथा इंजीनियरिंग, चिकित्सा, नर्सिंग, फार्मेसी, कृषि, प्रबंधन और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में लागू होगी। माझी ने कहा कि राज्य में एसटी आबादी 22 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद उन्हें केवल 12 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा था, जिसे अब उनकी जनसंख्या के अनुपात में बढ़ाया गया है। इससे मेडिकल सीट में एसटी छात्रों की संख्या 290 से बढ़कर 545 और एससी छात्रों की संख्या 193 से बढ़कर 393 हो जाएगी। इंजीनियरिंग की सीट में भी एसटी, एससी और एसईबीसी के लिए सीट बढ़ाई गई है। उल्लेखनीय है कि मंत्रिमंडल की बैठक में विभिन्न विभागों के 14 अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है।
एक लाख मीट्रिक टन की चावल की नीलामी करेगा ओडिशा
राज्य मंत्रिमंडल ने शनिवार को वित्तीय नुकसान से बचने और भंडार प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए 1 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) अधिशेष चावल को खुले बाजार में नीलामी के माध्यम से बेचने का निर्णय लिया है। खरीफ विपणन सत्र (केएमएस) 2024-25 के दौरान राज्य ने 73.46 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीद कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही रबी सत्र में खरीदे गए 19.19 लाख मीट्रिक टन धान को जोड़ने पर कुल खरीद अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
इससे अनुमानित 63.37 लाख मीट्रिक टन चावल (फोर्टिफाइड राइस कर्नेल सहित) का उत्पादन हुआ है। भारत सरकार ने 58 लाख मीट्रिक टन चावल की खरीद का लक्ष्य स्वीकृत किया था, जिसमें से लगभग 30 लाख मीट्रिक टन राज्य के भीतर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, ओडिशा वेलफेयर स्कीम और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत उपयोग किया जाएगा, जबकि 28 लाख मीट्रिक टन चावल को भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा केंद्रीय भंडार के लिए उठाया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप 5.37 लाख मीट्रिक टन चावल अधिशेष के रूप में सामने आया।
इसमें से 2.26 लाख मीट्रिक टन आंतरिक खपत के माध्यम से उपयोग किया जा चुका है और 1.09 लाख मीट्रिक टन चावल 121 आईटीडीए ब्लॉकों में वितरित किया जा चुका है, जिससे 2.02 लाख मीट्रिक टन चावल शेष बचा है। शेष भंडार के प्रभावी प्रबंधन के लिए मंत्रिमंडल ने ओडिशा राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को 1 लाख मीट्रिक टन अधिशेष चावल की खुले बाजार में नीलामी करने का अधिकार प्रदान किया है। यह नीलामी सरकार के दिशा-निर्देशों और एफसीआई द्वारा अपनाई गई मूल्य निर्धारण प्रणाली के अनुसार की जाएगी। नीलामी से होने वाले किसी भी वित्तीय नुकसान की भरपाई राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। इस प्रस्ताव को वित्त, कृषि एवं किसान सशक्तिकरण तथा सहकारिता विभागों के आवश्यक समर्थन के साथ मंत्रिमंडल की पूर्ण स्वीकृति प्राप्त हुई है।