भुवनेश्वर, (निप्र) : बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ओडिशा कैबिनेट ने ‘समग्र बाढ़ प्रबंधन योजना’ को 2,781 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दे दी। यह योजना अगले पांच वर्षों (वित्त वर्ष 2025-26 से 2029-30) के दौरान पूरी तरह राज्य के अपने संसाधनों से लागू की जाएगी। ओडिशा, जो बंगाल की खाड़ी के तटीय क्षेत्र में स्थित है, बाढ़, समुद्री ज्वार (स्टॉर्म सर्ज) और चक्रवातों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। राज्य का लगभग 33,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, जो इसके कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का करीब पांचवां हिस्सा है, बाढ़ प्रभावित है।
भारी वर्षा, नदियों में गाद जमाव (सिल्टेशन), कमजोर जल निकासी व्यवस्था, प्रतिकूल भौगोलिक स्थिति और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण बाढ़ अब मानसून के दौरान एक नियमित समस्या बन गई है। नई योजना में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपायों को मिलाकर एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया गया है। संरचनात्मक उपायों में तटबंधों को ऊंचा और मजबूत करना, खारे पानी से प्रभावित तटबंधों की सुरक्षा, पुनर्स्थापन कार्य तथा तटीय कटाव नियंत्रण शामिल हैं। वहीं गैर-संरचनात्मक उपायों में बाढ़ पूर्वानुमान, तैयारी, बाढ़ क्षेत्र निर्धारण (फ्लडप्लेन जोनिंग), प्रक्रियागत सुधार और बचाव कार्यों को सुदृढ़ करना शामिल है।
स्मार्टफोन खरीद पर खर्च होंगे 93.13 करोड़
मंत्रिमंडल ने शनिवार को पोषण अभियान के तहत 79,033 सैमसंग ए06 स्मार्टफोन की खरीद को मंजूरी दे दी है। इनकी कुल लागत 93.13 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। यह आदेश सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल के माध्यम से एम/एस एनएफ इंफ्राटेक सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को ‘सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0’ के तहत रीयल-टाइम निगरानी और सेवा वितरण को मजबूत करने के लिए हर चार वर्ष में एक बार स्मार्टफोन प्रदान किए जाते हैं।
इन स्मार्टफोनों का वितरण राज्यभर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिला पर्यवेक्षकों और ब्लॉक समन्वयकों (पोषण) को किया जाएगा। ये स्मार्टफोन लाभार्थियों के आसान पंजीकरण, पोषण ट्रैकर पर दैनिक डेटा प्रविष्टि, पूरक पोषण की निगरानी, फेस रिकग्निशन प्रणाली के माध्यम से घर ले जाने वाले राशन के वितरण, बच्चों के विकास मापन, प्री-स्कूल शिक्षा गतिविधियों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे की निगरानी को सुलभ बनाएंगे।