कटक, (निप्र) : पद्मश्री सम्मान से अलंकृत तथा ओडिशा के सुप्रसिद्ध घोड़ानाच लोकनृत्य कलाकार डॉ उच्छब चरण दास का बीमारी के उपचार के दौरान कटक जिले के चौद्वार स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे ओडिशा की पारंपरिक घोड़ानाच लोकनृत्य कला के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए आजीवन समर्पित रहे।
कला क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2021 में उन्हें पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया था। उनके निधन से राज्यभर के कलाकारों और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।डॉ दास का जन्म टांगीमानिया गांव में हुआ था। उन्होंने अपना अधिकांश बचपन कटक जिले के चौद्वार में बिताया, जहां उन्होंने अपनी शिक्षा प्राप्त की। कक्षा आठ में अध्ययन के दौरान ही उन्होंने अपना जीवन घोड़ानाच कला को समर्पित करने का संकल्प लिया। इसके बाद उन्होंने निरंतर प्रयास कर इस पारंपरिक लोकनृत्य को गांवों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वर्ष 1964 में उन्होंने घोड़ानाच प्रशिक्षण के लिए एक संस्था की स्थापना की। उस समय उनका परिवार गंभीर आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा था। अपनी पढ़ाई और कला साधना जारी रखने के लिए वे कॉलेज के बाद पान की छोटी दुकान चलाते थे और उससे होने वाली आय का एक हिस्सा घोड़ानाच सीखने तथा उसके प्रचार-प्रसार में खर्च करते थे।
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें नौकरी के कई प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने सभी अवसर ठुकराकर स्वयं को पूरी तरह घोड़ानाच कला के विकास के लिए समर्पित कर दिया। उन्हें जहां भी प्रस्तुति का अवसर मिलता, वे राज्य और राज्य के बाहर यात्रा करते थे। अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने लोककला को जनजागरुकता का माध्यम बनाते हुए सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी संदेश भी लोगों तक पहुंचाए।