भुवनेश्वर, (निप्र) : राजधानी में आयोजित ‘न्याय संहिता प्रदर्शनी’ में ओडिशा पुलिस की ऐतिहासिक कबूतर डाक सेवा का प्रदर्शन किया गया। यह कार्यक्रम यूनिट-3 स्थित आईडीसीओ प्रदर्शनी मैदान में आयोजित हुआ। प्रदर्शन के दौरान 18 बेल्जियन होमिंग कबूतरों को भुवनेश्वर से कटक की ओर दो चरणों में संदेश के साथ भेजा गया। उनके पैरों में छोटे कैप्सूल बांधकर संदेश भेजे गए, जिससे ऐतिहासिक पिजन पोस्ट परंपरा की झलक देखने को मिली। इन कबूतरों की दिशा पहचानने की क्षमता अत्यंत अद्भुत होती है। उनकी चोंच में मौजूद प्राकृतिक लौह संरचना पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को महसूस करने में मदद करती है, जिससे वे लंबी दूरी तय कर सही स्थान पर पहुंच जाते हैं।
यह परंपरा वर्ष 1946 में शुरू हुई थी, जब ओडिशा पुलिस को अमेरिकी सेना से 200 कबूतर मिले थे। बाद में यह व्यवस्था 700 से अधिक कबूतरों के नेटवर्क में विकसित हो गई। यह सेवा 1982 के बैंकई बाढ़ और 1999 के विनाशकारी चक्रवात के दौरान संचार व्यवस्था विफल होने पर बेहद उपयोगी साबित हुई थी। प्रदर्शनी में 1948 की एक ऐतिहासिक घटना भी याद की गई, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संबलपुर से कटक के लिए कबूतर के जरिए संदेश भेजा था। जहां उनकी कार को सात घंटे लगे, वहीं कबूतर ने यह दूरी मात्र पांच घंटे में तय कर ली थी। आज भी इस 70 वर्ष पुरानी परंपरा को जीवित रखने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। वर्तमान में कबूतरों को कटक और अनगुल के पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।