भुवनेश्वर, (निप्र) : ओडिशा सरकार ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जंगल की आग को रोकने और नियंत्रित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग शुरू कर दिया है। यह जानकारी वन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने मंगलवार को विधानसभा में दी। एक प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि एआई आधारित तकनीक का उपयोग जंगल क्षेत्रों में आग की भविष्यवाणी, निगरानी और रोकथाम के लिए किया जा रहा है। इस प्रणाली में बाय-स्पेक्ट्रल 360-डिग्री पीटीजेड कैमरे, एआई संचालित डेटा प्रोसेसिंग एवं विश्लेषण इकाइयां, मेष नेटवर्क तथा बहु-स्तरीय अलर्ट प्रणाली जैसे उन्नत उपकरण शामिल हैं।
अधिकारियों को एसएमएस, व्हाट्सऐप, ईमेल और डैशबोर्ड के माध्यम से रियल-टाइम अलर्ट प्राप्त होते हैं, जिससे आग की घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो पाती है। यह एआई आधारित निगरानी प्रणाली पहले ही राज्य के प्रमुख वन प्रभागों में लागू की जा चुकी है। इनमें मयूरभंज जिले के सिमिलिपाल उत्तर एवं दक्षिण प्रभाग, बरगढ़ जिले का हीराकुद प्रभाग, अनगुल जिले का अनगुल प्रभाग तथा सुंदरगढ़ जिले के राउरकेला और बणई प्रभाग शामिल हैं। इस तकनीक के क्रियान्वयन पर राज्य सरकार ने लगभग 10.75 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में जंगल की आग से 4,067 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ था, जो 2025 में बढक़र 4,609 हेक्टेयर हो गया।
अन्य राज्यों में रोजगार देने के लिए 129 ठेकेदारों को मिला लाइसेंस
श्रम एवं कर्मचारी राज्य बीमा मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने बताया कि अंतर-राज्य प्रवासी कामगार (रोजगार विनियमन एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1979 के तहत अन्य राज्यों में 7,273 प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए 129 ठेकेदारों को लाइसेंस प्रदान किए गए हैं। मंत्री का यह उत्तर विधायक संजीव कुमार मलिक द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में आया। मंत्री के अनुसार, पिछले 18 महीनों में संकटग्रस्त प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए उपमुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है और इसकी तीन बैठकें हो चुकी हैं।
इसके अलावा, मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों (2025 और 2026 तक) के दौरान श्रम अधिकारियों द्वारा 225 निरीक्षण किए गए, जिनमें विभिन्न ठेकेदारों के खिलाफ 16 मामले दर्ज किए गए हैं। प्रवासी श्रमिकों के आजीविका सशक्तिकरण के लिए उन्हें विभिन्न विभागों की कल्याणकारी एवं स्वरोजगार योजनाओं से जोडऩे हेतु प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाए जा रहे हैं और इसके लिए अलग-अलग विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
पिछले 3 वर्षों में हाथियों के हमलों में 443 लोगों की मौत
ओडिशा में पिछले तीन वर्षों के दौरान हाथियों के हमलों में कुल 443 लोगों की मृत्यु हुई है। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में यह जानकारी दी। बड़ंबा के विधायक विजय कुमार दलाबेहरा द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री ने बताया कि वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच हाथियों की घटनाओं के कारण 1,050 घर पूरी तरह नष्ट हो गए, जबकि 5,587 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इसी अवधि में 47,499.12 एकड़ फसल भी प्रभावित हुई।
मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में चिन्हित ‘हाथी कॉरिडोर’ की अब तक कोई सीमांकन रेखा निर्धारित नहीं की गई है। उन्होंने बताया वन्यजीव आवासों के संरक्षण और संवर्धन, हाथियों के भोजन के लिए वृक्षारोपण, चरागाहों का विकास, कृत्रिम जलाशयों का निर्माण, शिकार-रोधी शिविरों की स्थापना, वन भ्रमण, तकनीक के माध्यम से वन्यजीवों और शिकारियों की गतिविधियों की निगरानी, जागरुकता अभियान तथा हाथी सुरक्षा एवं क्षति नियंत्रण दलों की तैनाती की व्यवस्था की गई है।
इसके अतिरिक्त, संवेदनशील क्षेत्रों में खाइयों की खुदाई, पत्थर की दीवारों और निगरानी टावरों का निर्माण तथा जन सुरक्षा-गज रक्षा योजना के तहत रियायती दरों पर सोलर फेंसिंग की व्यवस्था भी की गई है। वन संरक्षण समिति (वीएसएस) और पर्यावरण विकास समिति (ईडीसी) के सदस्य भी जागरुकता फैलाने और जमीनी स्तर पर सहयोग प्रदान करने में शामिल हैं। वर्तमान में, ओडिशा के वनों में हाथियों की गतिविधियों की निगरानी और आसपास के समुदायों को सतर्क करने के लिए 1,420 प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली सक्रिय हैं।
3 साल में 264 हाथियों की मौत
भुवनेश्वर, (निप्र) : ओडिशा में पिछले तीन वर्षों के दौरान कुल 264 हाथियों की मौत हुई है। इनमें से 132 हाथियों की मौत प्राकृतिक कारणों से जबकि 132 की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई है। यह जानकारी राज्य के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने दी। मंत्री ने यह जवाब विधायक पद्म लोचन पंडा द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दिया। उन्होंने बताया कि इसी अवधि में 4 बाघ, 25 तेंदुए और 1,426 अन्य वन्यजीवों की भी मौत हुई है। इनमें से 447 वन्यजीवों की मौत शिकार (पोचिंग) के कारण हुई है, जो वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सरकार ने अवैध शिकार रोकने और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए निगरानी और कार्रवाई को और सख्त करने की बात कही है।