-
14 से 26 फरवरी तक भुवनेश्वर में होगा आयोजन
-
20 राज्यों के कारीगर होंगे शामिल
भुवनेश्वर : 20वें भव्य तोशाली स्वदेशी मेले को लेकर गीता गोविंद सदन में आयोजित प्रेस वार्ता में हथकरघा, वस्त्र एवं हस्तशिल्प मंत्री प्रदीप बल सामंत ने कहा कि यह मेला बुनकरों और शिल्पकारों के लिए 'समृद्धि का महाकुभ' सिद्ध होगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार कारीगरों की आजीविका सुदृढ़ करने और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। विभागीय आयुक्त-सह-सचिव गुहा पूनम तपस कुमार ने कहा कि यह आयोजन हमारी समृद्ध हथकरघा और हस्तशिल्प विरासत का जीवंत प्रतिबिंब बनेगा तथा पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण, संवर्धन और विपणन का सशक्त मंच प्रदान करेगा। राज्य सरकार के हथकरघा, वस्त्र एवं हस्तशिल्प विभाग द्वारा 14 से 26 फरवरी 2026 तक जनता मैदान, भुवनेश्वर में मेला आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष का विषय 'स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत' रखा गया है। ओडिशा सहित देश के 20 राज्यों के शिल्पकार और बुनकर इसमें भाग लेकर अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगे। मेले में इस वर्ष कुल 905 स्टॉल लगाए गए हैं। भारत सरकार के हस्तशिल्प विकास आयुक्त के सहयोग से 150 स्टॉल में विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प उत्पाद प्रदर्शित होंगे, जबकि हथकरघा विकास आयुक्त की ओर से 50 स्टॉल में बुनकर अपने उत्पाद दिखाएंगे। राज्य सरकार के हस्तशिल्प निदेशालय और वस्त्र-हथकरघा निदेशालय के अंतर्गत 281 शिल्पकार और 150 बुनकर अपने उत्पाद प्रस्तुत करेंगे। पहली बार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग श्रेणी के उत्पाद - जैसे विद्युत उपकरण, बैंकिंग-वित्तीय सेवाएं, वाहन, घरेलू उपकरण और दैनिक उपयोग की सामग्री 200 स्टॉल में उपलब्ध रहेंगे। 60 स्टॉल में स्वदेशी व्यंजन भी उपलब्ध होंगे। बॉयनिका, सम्बलपुरी वस्त्रालय, रेशम ओडिशा और उत्कलिका अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे, जबकि सिडैक और साधैक जैसी संस्थाएं शिल्पकारों और बुनकरों के लिए चल रही योजनाओं की जानकारी देंगी। हथकरघा, वस्त्र और रेशम के लिए तीन अलग-अलग थीम मंडप तैयार किए गए हैं, जिनमें सरकारी योजनाओं की उपलब्धियाँ और नई पहलें प्रदर्शित की जाएंगी। शिल्पकारों द्वारा प्रत्यक्ष शिल्प निर्माण का प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। 24 फरवरी को सिडैक, कला भूमि, गांदमुंडा, खंडगिरि में 1000 टेराकोटा कलाकारों के बीच भव्य प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। मेले में अग्निशमन सेवा, सुरक्षा व्यवस्था, नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक, प्राथमिक उपचार, एम्बुलेंस, पेयजल, शौचालय और एटीएम की व्यवस्था की गई है। महिला शिल्पकारों और बुनकरों के लिए नि:शुल्क आवास और परिवहन सुविधा उपलब्ध रहेगी। वृद्धजनों और दिव्यांग आगंतुकों के लिए सहायता केंद्र, व्हीलचेयर और विशेष शौचालय की व्यवस्था भी की गई है।