230 करोड़ के नशीले पदार्थ जब्त
कोरापुट, (निप्र) : ओडिशा में नशा तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए कोरापुट पुलिस ने अंतरराज्यीयस्तर पर सक्रिय एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो बड़े पैमाने पर हशीश ऑयल (लिक्विड गांजा) के अवैध उत्पादन में लिप्त था। यह बड़ी कार्रवाई कोरापुट जिले के पदवा थाना क्षेत्र अंतर्गत जलापुट जलाशय के भीतर स्थित घने जंगलों से घिरे एक द्वीपीय इलाके में की गई, जो ओडिशा-आंध्र प्रदेश सीमा के पास स्थित है। दुर्गम और दुश्वार भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस इलाके का लंबे समय से नशा तस्कर अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं।
यह अभियान 26 फरवरी 2026 को उस समय शुरू हुआ, जब खुफिया जानकारी के आधार पर विशेष रणनीतिक टीम ने नावों के जरिए जंगलों से घिरे द्वीप तक पहुंचकर एक हाई-रिस्क उभयचर (एम्फीबियस) छापेमारी की। पराजाबादापड़ा जंगल क्षेत्र में छिपाकर बनाए गए अस्थायी लैब पर धावा बोलते हुए पुलिस ने गांजा पौधों से हशीश ऑयल निकालने और प्रोसेस करने की पूरी तरह चालू फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया।
पदवा थाने में दर्ज एफआईआर के तहत दर्ज इस कार्रवाई को हाल के वर्षों में ओडिशा की सबसे बड़ी नशीले पदार्थों की बरामदगी में से एक माना जा रहा है। पुलिस ने मौके से 1,800.5 लीटर उच्च गुणवत्ता वाला हशीश ऑयल जब्त किया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 225 करोड़ रुपये आंकी गई है (कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा 200 से 225 करोड़ रुपये के बीच बताया गया है)। इसके अलावा करीब 1,000 किलो सूखा गांजा (गांजा पौधे के फूल और फल वाले हिस्से) भी जब्त किया गया, जिसकी कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। अस्थायी लैब में उन्नत औद्योगिक उपकरण लगे थे, जिनमें 28 केवी होंडा जनरेटर, पाइप और कनेक्टर लगे विशेष रूप से संशोधित प्रेशर कुकर, धातु के पाइप, इंडक्शन हीटर, स्टोरेज ड्रम, चिपकाने वाले रसायन और उत्पादन प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण शामिल थे।
पुलिस ने 80 लीटर रसायन और सफाई सॉल्वेंट भी जब्त किए, जिनमें मुख्य रूप से आइसोप्रोपाइल अल्कोहल शामिल था, जिसका इस्तेमाल किण्वन, आसवन और नियंत्रित ताप प्रक्रिया के जरिए तेल निकालने में किया जाता था। मौके से कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी मिले हैं, जो गिरोह के नेटवर्क को उजागर करने में अहम सुराग देंगे। प्रारंभिक छापेमारी के दौरान मौके से एक आरोपी लक्ष्मण खिल्ला (23) को गिरफ्तार किया गया। उसे 27 फरवरी 2026 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। हालांकि गिरोह का मुख्य सरगना और कुछ प्रमुख सदस्य पुलिस के पहुंचने से ठीक पहले घने जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए थे।
लगातार तलाशी अभियान के दौरान करीब 30 घंटे तक जंगलों में छिपे रहने के बाद छह और आरोपियों को पकड़ लिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में गिरोह का मास्टरमाइंड और मुख्य ऑपरेटर/कुक एलन जयराज (33), तिरुवनंतपुरम (केरल) का निवासी है। उसके साथ किरण डी (33), आनंद राज (28) और बिथु बी (34) सभी केरल के तिरुवनंतपुरम क्षेत्र से हैं। वहीं ओडिशा के स्थानीय लॉजिस्टिक्स सहयोगी के रूप में मालकानगिरी जिले के लैइचन खिल्ला (25) और कोरापुट जिले के साधु पांगी (45) को भी गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए आगे की जांच में जुटी हुई है।