भुवनेश्वर, (निप्र) : राज्य के महाधिवक्ता (एजी) पीतांबर आचार्य ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार पिछली बीजद सरकार द्वारा की गई उस ऐतिहासिक गलती को सुधारने के लिए कदम उठा रही है, जिससे पड़ोसी छत्तीसगढ़ के साथ महानदी जल विवाद उत्पन्न हुआ था। आचार्य ने पुरी में रविवार को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (एमडब्ल्यूडीटी) के सदस्यों के राज्य दौरे से इतर पत्रकारों को यह बयान दिया।
उन्होंने कहा, पिछली सरकार ने छत्तीसगढ़ में बांधों के निर्माण का विरोध न करके एक ऐतिहासिक गलती की थी। हम ओडिशा के लोगों के हित में स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठा रहे हैं। न्यायाधिकरण के सदस्यों ने हीराकुद जलाशय और सतकोसिया घाटी का दौरा किया तथा सोमवार उन्होंने चिलिका झील का निरीक्षण किया जाएंगे। आचार्य ने कहा, इन स्थानों को रामसर स्थल घोषित किया गया है और ये क्षेत्र महानदी के प्राकृतिक जल प्रवाह से सीधे जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा, न्यायाधिकरण के सदस्य जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए ओडिशा का दौरा कर रहे हैं। वे सात से 11 मार्च तक छत्तीसगढ़ का भी दौरा करेंगे। राज्य ने आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ द्वारा महानदी के ऊपरी इलाकों में बांध के निर्माण से इसके प्राकृतिक प्रवाह में बाधा उत्पन्न हुई है, जिससे निचले इलाकों के किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ओडिशा के इन आरोप के बाद 2018 में इस न्यायाधिकरण का गठन किया गया था।