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Saturday, Mar 14, 2026
Published on: Friday, March 13, 2026
राज्य

देश की अर्थव्यवस्था के आधार हैं किसान : माझी


पीएम-किसान योजना की सभी आवश्यक शर्तें पूरी कर लाभ उठाएं 
भुवनेश्वर, (निप्र) : राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने किसानों से आह्वान किया है कि वे पीएम-किसान योजना का लाभ लेने के लिए सभी अनिवार्य मानदंडों को पूरा करें। उन्होंने कहा कि किसान समाज की रीढ़ और देश की अर्थव्यवस्था के वास्तविक आधार हैं। किसानों के विकास के बिना देश या राज्य का विकास संभव नहीं है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को भुवनेश्वर स्थित ओयूएटी के कृषि शिक्षा सदन में आयोजित पीएम-किसान उत्सव दिवस तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त वितरण कार्यक्रम के अवसर पर किसानों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि असम के गुवाहाटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम-किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त जारी की।
 
इस किस्त के तहत देश के 9.32 करोड़ किसानों को लगभग 19 हजार करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। इस अवसर पर कार्यक्रम देश के सभी राज्यों के जिला, ब्लॉक, पंचायत, पैक्स और मंडियों में भी आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम-किसान योजना के तहत मिलने वाली 2000 रुपये की किस्त, जो साल में तीन बार मिलकर कुल 6000 रुपये होती है, सामान्य लोगों के लिए भले ही छोटी राशि लगे, लेकिन छोटे किसानों के लिए यह उनके परिश्रम का बड़ा सम्मान है। उन्होंने बताया कि राज्य में 34 लाख 24 हजार से अधिक पात्र किसानों को 22वीं किस्त के तहत प्रति किसान 2000 रुपये के हिसाब से कुल 684 करोड़ रुपये की सहायता दी जा रही है।
 
मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे योजना का लाभ पाने के लिए ई-केवाईसी, भूमि विवरण, आधार-बैंक खाते की लिंकिंग तथा आधार के अनुसार नाम संशोधन जैसी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर लें। उन्होंने बताया कि पीएम-किसान योजना के साथ-साथ राज्य सरकार भी ‘सीएम-किसान योजना’ के तहत पात्र किसानों को दो किस्तों में 4,000 रुपये की सहायता प्रदान कर रही है। इस योजना में 6 लाख से अधिक नए लाभार्थियों को शामिल किया गया है। अब तक सीएम-किसान योजना के अंतर्गत 51 लाख 54 हजार लाभार्थियों को 2991 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि दी जा चुकी है। इनमें 3236 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के किसान और 31 हजार 695 शहरी किसान भी शामिल हैं।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम-किसान योजना के लाभार्थियों के बच्चों को कृषि विद्यानीधि योजना के तहत छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है, जिससे वे देश के भीतर और बाहर स्थित सरकारी व निजी संस्थानों में चिकित्सा, इंजीनियरिंग, कृषि, नर्सिंग, डिप्लोमा और आईटीआई जैसे व्यावसायिक एवं तकनीकी पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर सकें। उन्होंने बताया कि 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में 13,923 छात्रों को इस योजना के तहत 53.67 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है। वहीं 2025-26 शैक्षणिक वर्ष के लिए अब तक 68,915 छात्रों ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया है, जिसके लिए लगभग 290 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के साथ मिलकर किसानों की आय दोगुनी करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने किसानों से केवल धान की खेती तक सीमित न रहकर दलहन, सब्जी, फल और अन्य नकदी फसलों की खेती पर ध्यान देने तथा फसल विविधीकरण (क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन) अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ओडिशा की मिट्टी अत्यंत उपजाऊ है और इसका सही उपयोग कर राज्य कृषि निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी बन सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित मौसम, जल संकट और मिट्टी का क्षरण कृषि क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि में नवाचार, जलवायु अनुकूल तकनीक, डिजिटल समाधान और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
 
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री तथा कृषि एवं किसान सशक्तिकरण मंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने कहा कि इस वर्ष की पहली पीएम-किसान किस्त शुक्रवार को जारी की गई है। उन्होंने कहा कि जो पात्र किसान 22वीं किस्त से वंचित रह गए हैं, वे आधार-बैंक लिंकिंग और भूमि से संबंधित आवश्यक दस्तावेज सही तरीके से जमा करें, ताकि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे।कार्यक्रम में एकाम्र-भुवनेश्वर के विधायक बाबू सिंह, खाेर्द्धा के विधायक प्रशांत जगदेव, कृषि विभाग के आयुक्त एवं सचिव सचिन रामचंद्र यादव, ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो प्रभात कुमार राउल, कृषि एवं खाद्य उत्पादन निदेशक शुभम सक्सेना तथा खाेर्द्धा के जिलाधिकारी अमृत ऋतुराज सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। 
 

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