भुवनेश्वर, (निप्र) : सतत शहरीकरण की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, आवास और शहरी विकास विभाग ने खारवेल भवन में शहरी भूमि प्रबंधन पर एक उच्चस्तरीय सत्र आयोजित किया। इस सत्र में विकसित ओडिशा की ओर राज्य की यात्रा में भूमि को एक रणनीतिक संसाधन के रूप में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया। हरि बल्लभ मिश्र, आईएएस (सेवानिवृत्त), ने अपने व्यापक प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाते हुए एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने शहरी भूमि प्रबंधन के बदलते कानूनी, प्रशासनिक और नीतिगत आयामों को स्पष्ट किया।
सत्र की शुरुआत करते हुए, आवास और शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) और इडको की अध्यक्ष उषा पाढ़ी ने इस बात पर जोर दिया कि रणनीतिक और सोच-समझकर किया गया भूमि प्रबंधन ही सतत, भविष्य के लिए तैयार शहरों के निर्माण और विकसित ओडिशा के विजन को साकार करने का केंद्र बिंदु है। उन्होंने शहरी भूमि संपत्तियों का पूरी तरह से लाभ उठाने के लिए भूमि की श्रेणियों, नियामक ढांचों और भूमि मूल्य अधिग्रहण जैसे अभिनव तंत्रों की गहरी समझ की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
इस सत्र में ओडिशा में भूमि की प्रमुख श्रेणियों को शामिल किया गया, जिनमें नजूल, खासमहल, सरकारी खास कब्जा (जीकेपीबी) और पट्टे (लीज होल्ड) के मामले शामिल थे। साथ ही, तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते संदर्भ में इन भूमियों के इष्टतम उपयोग पर विशेष बल दिया गया। नगरपालिका प्रशासन के निदेशक अरिंदम डाकुआ, सभी अतिरिक्त सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस सत्र में भाग लिया। इसके अलावा, कलेक्टरों, नगर आयुक्तों और राजस्व तथा सामान्य प्रशासन (जीए) विभागों के अधिकारियों ने भी प्रत्यक्ष और वर्चुअल, दोनों ही माध्यमों से इस सत्र में सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
मिश्र ने भूमि प्रबंधन के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर व्यावहारिक अंतर्दृष्टि साझा की, और साथ ही पुरानी वर्गीकरण प्रणालियों तथा बदलते नीतिगत ढांचों में स्पष्टता लाने पर जोर दिया। चर्चाओं के दौरान भूमि मूल्य अधिग्रहण को शहरी बुनियादी ढांचे के लिए एक सतत वित्तपोषण उपकरण के रूप में रेखांकित किया गया। इन चर्चाओं का मुख्य केंद्र-बिंदु नियोजित विकास और बेहतर सेवा वितरण के लिए भूमि संसाधनों का प्रभावी उपयोग करना था। विभाग ने पूरे ओडिशा में पारदर्शी और कुशल शहरी भूमि प्रबंधन को सुदृढ़ करने हेतु क्षमता निर्माण और ज्ञान-साझाकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुन: दोहराया।